मतदाताओं से मेलजोल बढ़ाने और समर्थन जुटाने में हुए सक्रिय
संवाद न्यूज एजेंसी
बड़ूही (ऊना)। आगामी पंचायत चुनाव को लेकर गांव-कस्बों में चुनावी माहौल बनना शुरू हो गया है। गली-मोहल्लों, चौपालों और दुकानों पर लोग राजनीतिक चर्चाओं में मशगूल दिखाई दे रहे हैं। संभावित प्रत्याशी भी मतदाताओं से मेलजोल बढ़ाने और समर्थन जुटाने में सक्रिय हो गए हैं।
गांवों में पंचायत चुनाव का महत्व विधानसभा और लोकसभा चुनाव से कम नहीं माना जाता। इसकी मुख्य वजह यह है कि ग्राम पंचायत से लेकर वार्ड पंच, प्रधान और जिला परिषद के प्रतिनिधि इस चुनाव से ही चुने जाते हैं। गांव के छोटे-बड़े विकास कार्यों की दिशा इन्हीं जनप्रतिनिधियों के निर्णय से तय होती है। यही कारण है कि पंचायत चुनाव को सबसे कठिन और महत्वपूर्ण माना जाता है। चुनाव प्रक्रिया के दौरान प्रतिस्पर्धा इतनी तीखी हो जाती है कि विकास के मुद्दे अक्सर पीछे छूट जाते हैं और निजी आरोप-प्रत्यारोप हावी हो जाते हैं। पिछले कुछ वर्षों में पंचायत चुनाव का स्वरूप तेजी से बदला है। पहले जहां जातीय समीकरण और व्यक्तिगत छवि अधिक मायने रखते थे, वहीं अब धनबल और चुनावी खर्च का असर भी स्पष्ट दिखने लगा है। कई बार मतदाता भी क्षेत्रीय विकास के बजाय व्यक्तिगत हितों और संबंधों को प्राथमिकता देने लगते हैं। नतीजतन, कुछ गांव आज भी सड़क, पानी, शिक्षा और स्वास्थ्य जैसी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं।
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पंचायत चुनाव हमारे लिए बहुत अहम हैं। सड़क और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं का हल पंचायत स्तर पर ही निकलता है। इस बार वे ऐसे उम्मीदवार को चुनेंगे जो वादे पूरे करे। -सोनू धीमान, निवासी टकारला
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अब वक्त आ गया है कि लोग जात-पात से ऊपर उठकर विकास को प्राथमिकता दें। हमें शिक्षा और स्वास्थ्य पर ध्यान देने वाले प्रत्याशी चाहिए। शिक्षा और स्वास्थ्य लोगों की मूलभूत आवश्यकता है । गांव का प्रधान ऐसे विषयों पर ध्यान देने बाला होना चाहिए l -संजीव कुमार, निवासी चक्क
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चुनाव आते ही नेता गांव में दिखाई देने लगते हैं। लेकिन ऐसे व्यक्ति का चयन करना होगा जो चुनाव के बाद भी हर समय जनता के बीच मौजूद रहे। लोकसभा ओर राज्यसभा में जो नीतियां बनती हैं। उन्हें धरातल पर उतारना प्रधान का काम होता है। -नरेश कुमार, निवासी जोल
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आज भी कई घरों तक पीने का पानी सही से नहीं पहुंचता। महिलाएं सबसे ज्यादा परेशान होती हैं। कोई ऐसा प्रधान बने जो ऐसी समस्या के समाधान क़ो प्राथमिकता दे। -करण सिंह, निवासी चक्कसराए