स्कूल भवन, बायोमेट्रिक मरम्मत और खेलों के लिए इस्तेमाल होती है राशि
प्राथमिक शिक्षक संघ ने कहा- राशि को आवंटित करने के तरीके में हो बदलाव
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। शिक्षा के ढांचे को मजबूती देने के लिए नई शिक्षा प्रणाली 2020 के अंतर्गत प्राथमिक पाठशाला में विभिन्न अनुदान दिए जाते हैं। इनमें सबसे महत्वपूर्ण समग्र अनुदान यानी कंपोजिट ग्रांट को माना जाता है, लेकिन अब इस ग्रांट के तहत आने वाली राशि कई स्कूलों के लिए कम पड़ रही है।
यहीं नहीं हर साल अगस्त माह तक आने वाली यह ग्रांट इस बार अक्तूबर माह बीत जाने के बाद भी नहीं आई। स्कूलों में यह राशि बच्चों की संख्या के हिसाब से जारी होती है। यह केंद्रीय सरकार के अधीन परियोजना है, इस ग्रांट में से खेलों के लिए, स्कूल भवन, शौचालय और बायोमेट्रिक मशीनों की मरम्मत व कक्षा के कमरों में बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना, अग्निशमन यंत्रों की मरम्मत, पठन पाठन सहायक सामग्री स्टेशनरी आदि भी इसी ग्रांट से होती है।
जानकारी के अनुसार अनुदान की राशि का वितरण शिक्षा विभाग की ओर से बच्चों की संख्या के हिसाब से विभिन्न श्रेणियों में बांटा गया है। एक से 30 तक विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों को 10000, 31 से 100 तक 25000 हजार और 100 से 250 तक की संख्या वाले स्कूलों को 50000, 251 से 1000 तक वाले स्कूलों को 75000 रुपये तथा 1000 से अधिक संख्या वाले बच्चों के स्कूल में एक लाख की राशि जारी की जाती है। प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला प्रधान राकेश शर्मा और महासचिव सत्येंद्र मिन्हास ने कहा कि यह बजट हर वर्ष अगस्त महीने में आता रहा है, परंतु अब की बार तीन महीने ऊपर हो जाने के बावजूद भी इस बजट की राशि उपलब्ध नहीं हुई है।
उन्होंने कहा कि कम संख्या वाले स्कूलों में भी भवनों की मरम्मत तथा अन्य वस्तुएं सहायक सामग्री अधिक संख्या वाले विद्यार्थियों के स्कूलों की तरह ही इस्तेमाल होती हैं। कहा कि 100 विद्यार्थियों की संख्या वाले स्कूलों को तथा इससे ऊपर की संख्या वाले स्कूलों को मिलने वाला बजट तर्कसंगत नहीं है। पांच श्रेणियां की बजाय एक से 100 तक तथा 100 से ऊपर कैटेगरी बनाई जाए। राशि समय पर जारी कर दी जाए, ताकि सामान तथा मजदूरी के पैसे समय पर दिए जा सकें।
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समग्र अनुदान की राशि सरकार की ओर से निर्धारित नियमों के तहत ही जारी होती है। इसे अधिक या कम करना भी सरकार के अधीन है। अगर सरकार इस संबंध में कोई नया आदेश देती है, तो उसे तुरंत लागू करके अमल में लाया जाएगा।
राकेश अरोड़ा, डाइट प्रधानाचार्य, देहलां, ऊना