ऊना के कुरियाला में सतवीर सिंह ठाकुर के फार्म हाउस में उगी मशरूम
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ऊना। जिला मुख्यालय के साथ लगते कुरियाला गांव के 55 वर्षीय व्यक्ति ने डॉक्टरी (प्राइवेट प्रेक्टिस) छोड़कर कोरोना संकट में मशरूम की खेती को अपनाया है। अब वह मुनाफा कमाने के साथ और लोगों को भी रोजगार दे रहे हैं। वे ऊना के होटलों और सब्जी मंडी में 200 रुपये प्रति किलो तक मशरूम बेच रहे हैं।
इस वक्त उन्होंने 1500 बैग में मशरूम लगाई है। आने वाले समय में वह इन बैग को बढ़ाकर 2500 तक करने जा रहे हैं। गर्म जिला होने के कारण ऊना में केवल सर्दियों में ही मशरूम फसल होती है, लेकिन कुरियाला के सतवीर 12 माह मशरूम फसल ले रहे हैं। तापमान को नियंत्रित करने के लिए एसी लगाए हैं। फसल के लिए उचित तापमान का ध्यान रखते हुए सभी चीजों को सही तरीके से रखते हुए गर्मियों में भी फसल निकाली जा रही है। सतवीर ने वर्ष 2008 में इस संबंध में प्रशिक्षण लिया था। कृषि में रुचि के चलते उन्होंने मशरूम का कारोबार चलाया। फिलहाल एक वर्कर रखा है और साथ में परिवार के चार पांच सदस्य भी इसी कार्य में सहयोग करते हैं।
कुरियाला के सतवीर ने बताया कि 21.83 लाख रुपये के प्रोजेक्ट में आठ लाख रुपये सब्सिडी मिली। सितंबर 2020 से उन्होंने मशरूम उगाना शुरू की। अब तक वे करीब चार बार फसल लेकर करीब 60 क्विंटल उत्पादन कर चुके हैं। इसमें उन्हें करीब चार लाख रुपये तक का मुनाफा हुआ है। उन्होंने कहा कि बैंक से उन्हें लोन के पूरे रुपये नहीं मिल पाए हैं। यदि यह भी मिल जाएं तो वह सालाना 20 टन मशरूम की खेती कर सकते हैं। इससे 12 लाख रुपये तक मुनाफा हो सकता है। आने वाले समय में कारोबार बढ़ने पर दूसरों को भी रोजगार मिलेगा। बता दें कि सतवीर ऊना जिले के डुमखर में क्लीनिक चलाते थे। वर्ष 2018 में पिता के निधन के बाद वह घर में रहने लगे। उनका रुझान कृषि की तरफ बढ़ा। इसके बाद ही उन्होंने मशरूम फार्म खोलने का फैसला लिया। अब वे दूसरे लोगों के लिए भी प्रेरणा स्रोत बन चुके हैं।
40 फीसदी दी जा रही सब्सिडी
बागवानी विभाग के विशषवाद विशेषज्ञ ऊना डॉ. केके भारद्वाज ने बताया कि हिमाचल खुंभ विकास योजना के तहत मशरूम फार्म खोलने पर 40 फीसदी सब्सिडी दी जाती है। इस योजना के तहत वर्षभर खेती की जा सकती है। 20 लाख रुपये खर्च करने पर अधिकतम आठ लाख रुपये सब्सिडी दी जाती है। उन्होंने बताया कि किसानों की गाइडेंस के लिए निरीक्षण किया जाता है।