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Una News: सामान्य बस किराये में बढ़ोतरी कर जनता की जेब पर डाला डाका

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प्रदेश सरकार के निर्णय का जनता ने किया कड़ा विरोध
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माननीयों के वेतन, भत्तों में बढ़ोतरी कर अब जनता से की जा रही उगाही
बोले- फैसला न बदला तो सड़क पर उतरने के लिए होना पड़ेगा विवश
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। सामान्य बस किराये में 15 फीसदी बढ़ोतरी के सरकार के निर्णय का जनता ने कड़ा विरोध किया। पहले ही सामान्य किराये में वृद्धि की थी। अब उसमें और इजाफा करने से इसका सीधे तौर पर आम जनता पर असर पड़ेगा। इसका जनता ने खुलकर विरोध किया है। लोगों का कहना है कि माननीयों के वेतन-भत्तों में की गई बढ़ोतरी अब प्रदेश की जनता से उगाही जा रही है। सरकार को चेताया कि इस निर्णय को लागू करने से पहले विचार करे अन्यथा मजबूरन होकर जनता को अपने अधिकारों के लिए सड़क पर उतरने के लिए विवश होना पड़ेगा।
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ऊना से दिल्ली के लिए 500 रुपये, हरिद्वार के लिए 500 रुपये, अमृतसर के लिए 250 रुपये, लुधियाना के लिए 180 रुपये सामान्य किराया लिया जाता था। अब 15% वृद्धि करने से किराये में और इजाफा होगा। यहां 500 रुपये किराया लिया जाता था अब 575 लगेंगे। शुक्रवार से निगम प्रबंधन और अन्य संचालकों ने जनता से इसे वसूलना शुरू कर दिया है। वर्तमान में मशीनों को भी अपडेट करने की प्रक्रिया में निगम का प्रबंधन जुट गया है। जिले से बाहरी राज्यों के लिए 30 के करीब बसों का संचालन किया जाता है।
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अंब की नीलम देवी ने कहा कि एक तरफ देश संकट के दौर से गुजर रहा है। पाकिस्तान के साथ तनावपूर्ण हालात हैं। ऐसे समय में राज्य सरकार की ओर से बस किराये में 15 प्रतिशत की बढ़ोतरी करना जनता के साथ अन्याय है। पहले ही महंगाई ने जीना मुश्किल कर दिया है। ऊपर से इस तरह का बोझ जनता पर डालना बेहद निंदनीय है। सरकार को फैसले पर पुनर्विचार करना चाहिए।
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चक्क की शशि बाला का कहना है कि ग्रामीण इलाकों के लोग रोजाना बसों पर निर्भर करते हैं। पहले ही हर चीज़ महंगी हो चुकी है। अब बस किराया बढ़ाकर सरकार ने आम आदमी की कमर तोड़ दी है। यह फैसला ऐसे समय में आया है जब देश संकट में है। यह आम जनता के जख्मों पर नमक छिड़कने जैसा है। सरकार से आग्रह करते हैं कि फैसले को तुरंत वापस लिया जाए।
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दिलवां के रशपाल शर्मा का कहना है कि नेताओं ने चाहे वह पक्ष हो, चाहे विपक्ष, सभी ने मिलकर अपनी तनख्वाह बढ़ाई है। अब उनकी तनख्वाह के लिए बस किराया बढ़ाकर लोगों की जेब काटी जा रही है।
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बड़ूही के पृथ्वी चंद का कहना है कि वे दिहाड़ी-मजदूरी करने वाले लोग हैं। हमें दूसरे गांव बस में बैठकर दिहाड़ी करने जाना पड़ता हैं। सरकार ने किराया बढ़ाकर हम जैसे गरीब लोगों के पेट पर लात मारने का काम किया है।
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