गगरेट (ऊना)। प्रदेश के बजट पर प्रतिक्रिया देते हुए स्कूल प्रवक्ता संघ के राज्य अध्यक्ष अजय नेगी और अन्य पदाधिकारियों ने कहा कि ग्रुप-बी के कर्मचारियों और अधिकारियों के वेतन का तीन प्रतिशत हिस्सा डिफर करने के निर्णय पर सरकार को पुनर्विचार करना चाहिए।
उन्होंने कहा कि ग्रुप-बी श्रेणी वास्तव में प्रदेश के उस मध्यवर्गीय कर्मचारी वर्ग का प्रतिनिधित्व करती है, जिसे प्रशासनिक व्यवस्था की रीढ़ माना जाता है। यह वर्ग न तो उच्च आय वर्ग में आता है और न ही इसे किसी विशेष वित्तीय सुरक्षा का लाभ प्राप्त होता है।
अधिकांश ग्रुप-बी कर्मचारी हाउस लोन, वाहन लोन, बच्चों की शिक्षा, चिकित्सा खर्च और अन्य पारिवारिक जिम्मेदारियों के आर्थिक दबाव में पहले से ही जूझ रहे हैं। ऐसे में वेतन का तीन प्रतिशत हिस्सा डिफर करने का निर्णय उनके मासिक बजट को सीधे प्रभावित करेगा और उनके जीवन-यापन पर प्रतिकूल असर डालेगा।
अजय नेगी ने कहा कि वर्तमान समय में महंगाई लगातार बढ़ रही है। दैनिक उपयोग की वस्तुओं, शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं के खर्च में हो रही वृद्धि ने पहले ही कर्मचारियों की आर्थिक स्थिति को चुनौतीपूर्ण बना दिया है। ऐसे में कर्मचारियों से यह अपेक्षा करना कि वे अपने वेतन का एक हिस्सा भविष्य के लिए स्थगित कर दें, न तो व्यावहारिक है और न ही न्यायसंगत है।