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Una News: निजी स्कूलों ने रोके स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट, दाखिले को भटक रहे बच्चे और अभिभावक

Sat, 04 Apr 2026 07:01 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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ऊना। जिले में नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही कई निजी स्कूलों की कार्यप्रणाली सवालों के घेरे में आ गई है। जिले के कई निजी स्कूल विद्यार्थियों को समय पर स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट (एसएलसी) जारी नहीं कर रहे। इसका खामियाजा उन अभिभावकों और विद्यार्थियों को भुगतना पड़ रहा है जो निजी स्कूलों से निकालकर अपने बच्चों का दाखिला सरकारी स्कूलों के सीबीएसई सेक्शन में करवाना चाहते हैं।
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ऊना शहर के सरकारी स्कूल में इस बार सीबीएसई पाठ्यक्रम शुरू होने के बाद बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों का दाखिला करवाने के लिए पहुंच रहे हैं। शहर के सरकारी स्कूलों में बेहतर शैक्षणिक वातावरण, अनुभवी शिक्षक, कम खर्च और सीबीएसई पाठ्यक्रम मिलने के कारण अभिभावकों का रुझान तेजी से बढ़ा है। निजी स्कूलों द्वारा स्कूल लीविंग सर्टिफिकेट जारी न किए जाने से बच्चों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
सूत्रों के अनुसार कई अभिभावक बीते कई दिनों से निजी स्कूलों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन उन्हें तरह-तरह के कारण बताकर टाल दिया जा रहा है। कहीं फीस का हवाला दिया जा रहा है तो कहीं रिकॉर्ड पूरा न होने की बात कही जा रही है। कुछ अभिभावकों का आरोप है कि निजी स्कूल जान बूझकर प्रमाण पत्र जारी नहीं कर रहे ताकि बच्चों का दाखिला दूसरे स्कूलों में न हो सके।
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अभिभावकों का कहना है कि उन्होंने नए सत्र के लिए सरकारी स्कूलों में प्रवेश की प्रक्रिया शुरू कर दी है लेकिन एसएलसी के बिना दाखिला संभव नहीं हो पा रहा। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी।

दरअसल, इस बार ऊना जिला के आठ सरकारी स्कूलों में सीबीएसई सेक्शन शुरू होने के बाद निजी स्कूलों के सामने प्रतिस्पर्धा बढ़ गई है। अब तक अधिकांश अभिभावक सीबीएसई शिक्षा के लिए निजी स्कूलों का ही रुख करते थे लेकिन सरकारी स्कूलों में भी वही पाठ्यक्रम उपलब्ध होने से स्थिति बदल गई। सरकारी स्कूलों में नाममात्र की फीस, बेहतर सुविधाएं और योग्य अध्यापक मिलने के कारण बड़ी संख्या में अभिभावक अपने बच्चों को वहां पढ़ाना चाहते हैं। अभिभावकों ने इस मामले को लेकर शिक्षा विभाग से हस्तक्षेप की मांग उठाई है। उनका कहना है कि विभाग को ऐसे निजी स्कूलों के खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए जो विद्यार्थियों और अभिभावकों को अनावश्यक रूप से परेशान कर रहे हैं।
उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान का कहना है कि यदि किसी निजी स्कूल द्वारा जान बूझकर प्रमाण पत्र देने में देरी की जा रही है तो अभिभावक लिखित शिकायत दर्ज करवा सकते हैं। शिकायत मिलने के बाद संबंधित स्कूल से जवाब तलब किया जाएगा और नियमों के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
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