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Una News: गर्मियों का सीजन शुरू होने से पहले ही बढ़ गए पंखों, एसी और कूलर के दाम

Wed, 08 Apr 2026 06:34 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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गगरेट (ऊना)। अर्थशास्त्र का नियम हैं कि जब-जब वस्तुओं के दाम बढ़ते हैं तो बाजार में वस्तुओं की मांग में कमी आ जाती है। इसके विपरीत जब वस्तुओं के दामों में कमी दर्ज होती हैं तो बाजार भी ग्राहकों से गुलजार होने लगते हैं। बस इसी तरह मांग, सप्लाई और आपूर्ति का खेल वर्षों से चला आ रहा है। आज के समय में चाहे इसे युद्ध का असर कहें या कुछ और लेकिन आज हर वस्तु के दाम में बढ़ोतरी हो रही हैं और महंगाई बढ़ती ही जा रही है। इसी तर्ज पर गर्मियों का सीजन शुरू होने से पहले ही पंखों, कूलर और एसी के दामों में बढ़ोतरी दर्ज हो गई हैं। इलेक्ट्रोनिक्स विक्रेताओं के अनुसार पंखो के दामों में अभी से ही 100 से 200 रुपये तक की बढ़ोतरी हो गई है। वहीं कूलर के दाम भी 200 से 500 रुपये तक बढ़ गए हैं। इसी तर्ज पर एसी के दामों में भी बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है। पहले आम पंखा 800 से 1000, 1500 का मॉडल के हिसाब से उपलब्ध था। अब इन्हीं पंखों के दाम 200 से 500 तक बढ़ चुके हैं। बढ़ते हुए दामों से व्यापारियों को अच्छे सीजन की आस है। अभी गर्मी का सीजन पूरी तरह शुरू नहीं हुआ हैं परन्तु दुकानदारों ने गर्मियों का स्टॉक पूरा करना शुरू कर दिया है और दुकानों पर सजाना भी शुरू कर दिया है।
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गर्मियों का सीजन शुरू होने से पहले ही पंखे, कूलर व अन्य वस्तुओं के दाम बढ़ गए हैं। बढ़ते हुए दामों के चलते बाजार मंदी के दौर से गुजर रहा है। इसके बावजूद गर्मियों का स्टॉक पूरा कर रहे हैं।
- संजय शर्मा, व्यापारी गगरेट


गर्मियों के सीजन में बिकने वाले इलेक्ट्रोनिक्स सामान के दामों में बढ़ोतरी हो रही है। हर वस्तु के दाम रोज नए आ रहे हैं। प्रतिस्पर्धा के समय में दुकानदारों को अपना प्रॉफिट कम कर बाजार में टिके रहना है। आने वाले सीजन में मंदी दूर होने की आस हैं। इस समय दुकानों में भरपूर सामान भरा जा चुका है। अब बस सीजन का इंतजार है।
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- मनोज धीमान मंगा, व्यापारी गगरेट



बढ़ती महंगाई में अब हर कदम फूंक-फूंक कर रखना पड़ रहा है। मात्र आवश्यकता पड़ने पर ही बाजारों से खरीदारी कर काम चलाना पड़ रहा है। महंगाई का असर जेब पर भारी हो गया है।

- पवन नंबरदार, निवासी अंबोटा




खाड़ी देश में चल रहे युद्ध का असर सब वैश्विक स्तर पर दिखना शुरू हो गया है। सीमित कमाई में खर्चों का बोझ बढ़ता जा रहा है। आमदनी बढ़ नहीं रही, खर्चे प्रतिदिन बढ़ रहे हैं। मात्र आवश्यकता पड़ने पर ही बाजार का रुख करते हैं।
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- रमणीक पराशर, निवासी गगरेट
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