मजदूरों के बजाय अब किसान मशीनों से आलू निकालने को दे रहे तरजीह
किसानों को मजदूरों और आलू की ढुलाई का खर्च पड़ रहा भारी
अब मात्र फसल को खेत ने निकालने पर जोर, बड़े किसानों को लाखों का नुकसान
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले में 60 फीसदी आलू की फसल खेतों से निकालकर मंडियों तक पहुंच चुकी है। शुरुआत में जहां आलू 3,800 रुपये प्रति क्विंटल बिक रहा था, वहीं अब इसका दाम घटकर 600 रुपये प्रति क्विंटल रह गया है। मात्र 20 दिन में आई इस तेज गिरावट ने किसानों की कमर तोड़ दी है। कई किसानों को मजबूरन नुकसान उठाकर ही फसल मंडी ले जानी पड़ रही है। कुछ किसानों को तो लाखों रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।जानकारी के अनुसार जिले के सिंचाई-सुविधा उपलब्ध क्षेत्रों में करीब 2,000 हेक्टेयर में आलू की खेती की जाती है। छोटे किसानों ने 15 से 25 अक्तूबर के बीच ही खेतों में खड़ी फसल व्यापारियों को बेच दी थी, जब दाम ठीक-ठाक चल रहे थे। लेकिन, बड़े रकबे में खेती करने वाले किसान अभी भी फसल मंडी तक पहुंचा रहे हैं। किसानों रोहित कुमार, राजेश, सुनील और राहुल का कहना है कि फसल निकालने की मजदूरी 700 रुपये प्रति कनाल, बोरियों का खर्च और परिवहन शुल्क अलग से है। जितनी कीमत मिल रही है, उससे लागत भी पूरी नहीं हो रही। जेब से पैसा लगाकर फसल मंडी तक लानी पड़ रही है। मजदूरों के बजाय अब किसान मशीनों से आलू निकालने को तरजीह दे रहे हैं।
पंजाब और यूपी से बढ़ी आमद का असर
देश की बड़ी मंडियों में इस समय पंजाब और उत्तर प्रदेश से आलू की भारी आमद शुरू हो चुकी है, जिसका सीधा असर कीमतों पर पड़ा है। आमतौर पर ऊना की फसल बिकने के बाद दोनों राज्यों से सप्लाई शुरू होती है, लेकिन इस बार भारी बारिश के कारण स्थानीय बिजाई देरी से हुई, जिससे बाजार में प्रतिस्पर्धा बढ़ गई।
प्रोसेसिंग प्लांट से बेहतर दाम मिलने की उम्मीद
जिला कृषि उपनिदेशक कुलभूषण धीमान ने बताया कि आलू को कैश क्रॉप माना जाता है और इसके भाव पूरी तरह मंडियों में आमद पर निर्भर करते हैं। वर्तमान में दाम बहुत कम हैं, लेकिन ऊना में जल्द आलू का प्रोसेसिंग प्लांट लगाने की योजना है। परियोजना शुरू होते ही ऊना के आलू को बेहतर दाम मिलने लगेंगे।