थानाकलां (ऊना)। एक हाथ में राखी, दूसरे में मिठाई और चेहरे पर त्योहार की खुशी... रक्षाबंधन की ऐसी तस्वीर शुक्रवार को अधिकांश घरों में देखने को मिली।
थानाकलां क्षेत्र में कुछ महिलाओं के हाथों में त्योहार की राखी नहीं बल्कि फावड़ा और कस्सी नजर आई। जब परिवार के साथ त्योहार मनाने का समय था, तब सुनीता, रमन, कमला देवी और पुष्पा देवी सड़क किनारे वीबी-जी राम जी योजना के काम में जुटी थीं। चेहरे पर त्योहार की खुशी के बजाय परिवार का पेट पालने की चिंता थी।
महिलाओं ने बताया कि रक्षाबंधन पर घर में रहकर परिवार के साथ समय बिताने की इच्छा तो होती है लेकिन महंगाई के दौर में आर्थिक मजबूरियां त्योहार से बड़ी हो जाती हैं। उनका कहना था कि मजदूरी उनके परिवार की आय का महत्वपूर्ण जरिया है।
ऐसे में यदि एक दिन भी काम छोड़ दें तो घर का खर्च प्रभावित हो जाता है। उन्होंने कहा कि अगर हम छुट्टी कर लें और काम पर न आएं तो बाद में लोग कहेंगे कि काम नहीं किया। महंगाई के इस दौर में परिवार का जीवनयापन करने के लिए मजदूरी करनी पड़ती है। महिलाओं की यह बात त्योहार के बीच उनकी आर्थिक स्थिति की पूरी कहानी बयां कर गई।
महिलाओं ने बताया कि रक्षाबंधन उनके लिए भी उतना ही भावनात्मक पर्व है। वह भी चाहती हैं कि भाइयों के साथ त्योहार मनाएं, राखी बांधें और परिवार के साथ बैठकर खुशियां साझा करें लेकिन घर की जरूरतें और रोजमर्रा का खर्च उन्हें काम पर आने के लिए मजबूर करता है।
महिलाओं ने प्रशासन से वीबी-जी राम जी योजना में मजदूरों के त्योहारों और अवकाश से जुड़े प्रावधानों को स्पष्ट करने और उनकी आर्थिक परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए उचित व्यवस्था करने की मांग की।