ऊना। शहर में पुराने और नवनिर्मित घरों के आकलन के लिए पहली बार होने वाले जीआईएस (जियोग्राफिक इंफोर्मेशन सिस्टम) सर्वे को शहरी विकास विभाग से मंजूरी मिल गई है। अब सर्वे के साथ ऊना शहर में हाउस टैक्स चोरी का पता लगेगा।
नगर परिषद अगले माह तक इस हाईटेक सर्वे को करवाने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर देगी। इस सर्वे को हाईटेक सैटेलाइट सिस्टम के माध्यम से किया जाएगा। नगर परिषद की तरफ से शहर के भवनों के आकलन के लिए होने वाले जीआईएस सर्वे की प्रक्रिया अगले माह शुरू होने जा रही है। इस सर्वे से नगर परिषद के अलावा शहरवासियों को भी इस सर्वे से लाभ मिलेगा। जीआईएस सर्वे पूरा होने के बाद हाउस टैक्स आनलाइन जमा हो पाएंगे। दूसरी तरफ हाउस टैक्स चोरी करने वालों पर लगाम कसने में नगर परिषद को सहायता मिलेगी। इस सर्वे को करवाने का मकसद ऊना शहर में भवनों का आकलन और नव निर्माण पर पैनी नजर रखना है।
बता दें कि इस समय नगर परिषद में हाउस टैक्स वसूलने का काम साधारण नप कार्यालय में जाकर जमा होता है। इसमें नप को कई बार भवन के असल रूप और संख्या के बारे में पता नहीं लग पाता है। जीआईएस सर्वे होने के दौरान भवन का सैटेलाइट इमेज, हाई रेज्यूलेशन फोटो जिसमें भवन की नींव से लेकर पूरे भवन की जांच की जाएगी। इसके आधार पर ही हाउस टैक्स वसूला जाएगा। इस संबंध में कार्यकारी अधिकारी संदीप कुमार ने बताया कि ऊना शहर भवनों के आकलन के लिए प्रस्तावित जीआईएस सर्वे को शहरी विकास विभाग के मंजूरी मिल गई है। सर्वे करवाने के लिए जल्द ही टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी।
नप का बढ़ेगा राजस्व
जीआईएस सर्वे से नगर परिषद से राजस्व को भी बढ़ेगा। इससे नगर परिषद शहर में अन्य सुविधाएं देने के लिए लिए अपने दम पर आर्थिक तौर पर सक्षम हो जाएगी। साथ ही नगर परिषद का 50 प्रतिशत तक राजस्व बढ़ने का अनुमान है। साथ ही हाउस टैक्स जमा करवाने के लिए सर्वे होने के बाद ऑनलाइन माध्यम से टैक्स जमा हो पाएगा।