जिले के अधिकतर स्कूलों में औपचारिकता मात्र के लिए बनाई हैं वाटिकाएं
मिड-डे मील में नहीं हो रहा वाटिकाओं में तैयार पोषक तत्वों का इस्तेमाल
विभाग ने मिड-डे मील के लिए वाटिकाएं तैयार करने के दिए हैं आदेश
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिले के शत प्रतिशत सरकारी स्कूलों में मिड-डे मील को अधिक पोषक बनाने के मकसद से न्यूट्रिशन गार्डन (पोषण वाटिका) तैयार करने के आदेश शिक्षा विभाग ने दिए हैं। ये आदेश हर शैक्षणिक सत्र में शिक्षा निदेशालय की ओर से नियमित तौर पर दिए जाते हैं। वर्तमान शैक्षणिक सत्र में तो निदेशालय की ओर से इससे जुड़ी एक रिपोर्ट भी मांगी गई। जिसमें बताना था कि कितने स्कूलों में सक्रियता से इस पर काम हो रहा और कहां नहीं।
इसके बावजूद स्कूलों की ओर से इस दिशा में कोई विशेष कदम नहीं उठाए गए। मात्र गमलों में कुछेक पौधे उगाकर औपचारिकता को पूरा किया गया। जानकारी के मुताबिक जिले के करीब 40 प्रतिशत स्कूलों में न्यूट्रिशन गार्डन तैयार करने के लिए गंभीरता से कार्य नहीं हो रहा। कई प्रबंधक स्कूल परिसर में कम स्थान को इसकी वजह बता रहे। वहीं, शिक्षा निदेशालय के निर्देशों में कहा गया कि सब्जियां तैयार करने के लिए अधिक जमीन की आवश्यकता नहीं है, उनके लिए स्कूल भवन की छतों और छोटे डिब्बे, प्लास्टिक के पॉट्स, बोतल और अन्य वस्तुओं में मिट्टी डालकर उगाया जा सकता है। इसके अलावा ईको क्लब फंड के जरिये पौधे उगाने वाले पॉट्स की खरीद कर सकते हैं। निदेशालय की ओर से कहा गया कि मिड-डे मील को बच्चों के स्वास्थ्य के लिहाज से बेहतर करने की जरूरत है।
इसके लिए विभिन्न पोषक सब्जियां पालक, धनिया, शलगम, मूली, चुकंदर आदि तैयार कर सकते हैं। इससे मिड-डे मील में पोषक तत्व बढ़ेंगे। विद्यार्थियों के लिए प्रतिदिन तैयार होने वाले मिड-डे मील को पहले से अधिक पौष्टिक बनाने के लिए स्कूलों को पोषण उद्यान तैयार करने के आदेश दिए गए हैं। इसमें विद्यार्थियों के साथ मल्टी टास्क वर्कर, स्कूल प्रबंधन कमेटी सहित अन्य का सहयोग लिया जा सकता है।
उपनिदेशक प्रारंभिक शिक्षा विभाग सोमलाल धीमान ने बताया कि स्कूलों के औचक निरीक्षण में न्यूट्रिशन गार्डन की स्थिति में परखी जा रही है। कहा कि जहां कमी पाई जा रही, वहां सुधार के लिए जरूरी कदम और विकल्प भी बताए जा रहे। कहा कि किसी भी स्कूल में इससे जुड़ी लापरवाही पाई गई, तो कार्रवाई की जाएगी। सभी स्कूल प्रबंधक इसपर गंभीरता से कार्य करें।