माता चिंतपूर्णी के दरबार दर्शनों को उमड़ी भीड। संवाद
- फोटो : बहराइच के देहात कोतवाली परिसर में खड़ी बाइकें।
कड़ाके की ठंड के बीच उमड़ी आस्था की भीड़, श्रद्धा पर नहीं पड़ा मौसम का असर
संवाद न्यूज एजेंसी
चिंतपूर्णी/भरवाईं (ऊना)। विश्व विख्यात शक्तिपीठ माता चिंतपूर्णी में जनवरी माह के ज्येष्ठ रविवार को श्रद्धालुओं की अच्छी खासी चहल-पहल देखी गई। हालांकि पिछले कुछ दिनों से कड़ाके की ठंड और शुष्क मौसम के चलते श्रद्धालुओं की संख्या कम रही थी, लेकिन रविवार होने के कारण मंदिर परिसर में रौनक लौट आई। माता चिंतपूर्णी मंदिर में रविवार को लगभग नौ हजार श्रद्धालुओं ने शीश नवाया और पूजा-अर्चना की। रविवार के दिन मौनी अमावस्या भी थी। वहीं, पंजाब और अन्य मैदानी क्षेत्रों में धुंध व कोहरे के कारण श्रद्धालुओं की संख्या अपेक्षाकृत कम रही। इसके बावजूद श्रद्धालु केवल एक घंटे में ही दर्शन करने में सफल रहे।
दर्शन करने आए श्रद्धालु सुनीता, रमन, राजू और सुक्खा ने बताया कि रविवार को भीड़ कम होने के कारण वे जल्दी दर्शन कर पाए। मंदिर अधिकारी अजय मंडियाल ने बताया कि भीड़ कम थी और लंबी लाइनें नहीं लगीं। उन्होंने बताया कि लगातार घना कोहरा और भीषण ठंड के कारण लोग घरों में रहने को मजबूर हैं, जिसका असर मंदिर में आने वाले श्रद्धालुओं की संख्या पर पड़ा है। मकर संक्रांति जैसे बड़े पर्व पर भी अपेक्षाकृत कम श्रद्धालु पहुंचे थे। श्रद्धालुओं की कमी का असर स्थानीय व्यापारियों और छोटे दुकानदारों के कारोबार पर भी देखा गया। इसके बावजूद, ज्येष्ठ रविवार के दिन बाबा माई सदन से लेकर मंदिर परिसर और मुख्य बाजार तक श्रद्धालुओं की अच्छी भीड़ रही। ठंड के बावजूद महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों की माता चिंतपूर्णी के प्रति आस्था और श्रद्धा कम नहीं हुई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु माता के दरबार में दंडवत होकर पावन पिंडी के दर्शन कर आशीर्वाद प्राप्त करते नजर आए। मंदिर परिसर से मुख्य बाजार तक श्रद्धालुओं की डबल लाइन लगी रही। जयकारों के साथ श्रद्धालु अनुशासित ढंग से अपनी बारी का इंतजार करते हुए माता के चरणों में नतमस्तक हुए। मंदिर प्रशासन ने श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए व्यापक इंतजाम किए थे। सुरक्षा में तैनात होमगार्ड और एक्स-सर्विसमैन पूरी तरह मुस्तैद रहे। सुगम दर्शन प्रणाली के तहत बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने लिफ्ट मार्ग का उपयोग कर पावन पिंडी के दर्शन किए। मंदिर अधिकारी अजय मंडियाल ने बताया कि मौसम की शुष्क और ठंडी स्थिति के कारण श्रद्धालुओं की संख्या में कमी आई है, लेकिन मंदिर प्रशासन लगातार श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं देने के लिए काम कर रहा है।