घनारी (ऊना)। तहसील घनारी के तहत संघनेई गांव में बंदरों का आतंक अब ग्रामीणों के लिए गंभीर समस्या बन गया है। बंदरों के हमले में अब तक तीन महिलाएं घायल हो चुकी हैं। इसके बाद गांव में भय का माहौल है और अभिभावकों को स्कूल आने-जाने वाले बच्चों की सुरक्षा की चिंता सताने लगी है। ग्रामीणों का कहना है कि गांव के रास्तों पर बंदरों के झुंड देखकर बच्चे सहम जाते हैं और अकेले आने-जाने से डरते हैं।
बंदरों के हमले में बनिता देवी पत्नी हरदीप सिंह, रक्षा देवी पत्नी नाथू राम निवासी वार्ड-3 और रोशनी देवी पत्नी रोशन लाल निवासी वार्ड नंबर-6 घायल हो चुकी हैं। हमले के बाद महिलाओं को उपचार करवाने के साथ आवश्यक इंजेक्शन भी लगवाने पड़े हैं। लगातार सामने आ रही घटनाओं के बाद ग्रामीणों में इस बात को लेकर रोष है कि तीन महिलाओं के घायल होने के बावजूद समस्या का स्थायी समाधान नहीं किया जा रहा।
पंचायत प्रधान करतार सिंह ने बंदरों के आतंक का मामला वन विभाग के समक्ष उठाया था। इसके बाद बीट गार्ड और वन मित्र ने गांव में पहुंचकर स्थिति का निरीक्षण भी किया। ग्रामीणों का आरोप है कि निरीक्षण के बाद भी बंदरों को आबादी वाले क्षेत्र से दूर करने के लिए कोई ठोस कदम धरातल पर नहीं उठाया गया। उनका कहना है कि समस्या लगातार बढ़ रही है और किसी बड़े हादसे से पहले कार्रवाई जरूरी है। ग्रामीणों के मुताबिक गांव में बंदरों के झुंड कई बार रास्तों पर दिखाई देते हैं। ऐसे में स्कूल जाने और लौटने वाले छोटे बच्चों को लेकर अभिभावक चिंतित हैं।
वन विभाग के रेंज ऑफिसर पूर्ण चंद ने बताया कि बंदरों को पकड़ने के लिए अधिकृत पकड़ने वालों का टेंडर किया जाना था। बजट उपलब्ध न होने के कारण टेंडर प्रक्रिया पूरी नहीं हो सकी, जिसके चलते बंदरों को पकड़ने की कार्रवाई आगे नहीं बढ़ पाई है।