आंगनबाड़ी वर्कर्स व हेल्पर्स तथा मिड-डे मील वर्कर्स ने मांगें पूरी न होने पर सीटू के बैनर तले जिला मुख्यालय पर रोष प्रदर्शन किया। इस अवसर पर आंगनबाड़ी व मिड-डे मील वर्कर्स ने जमकर प्रदेश व केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी की।
जिला प्रधान बलविंद्र कौर ने कहा कि पिछले 12 वर्षों से मिड-डे मील वर्कर्स के मानदेय में एक रुपया भी बढ़ोतरी नहीं हुई है। सरकारें महज आश्वासन देकर इस वर्ग को वोट बैंक के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं, जिसे सहन नहीं किया जाएगा। प्रदेश में तैनात मिड-डे मील वर्कर्स को सरकार द्वारा घोषित न्यूनतम वेतन दिया जाए। 10 महीनों की बजाय 12 महीनों का वेतन दिया जाए। इसके अलावा मिड-डे मील वर्कर्स को अर्जित अवकाश, आकस्मिक अवकाश, मेडिकल अवकाश वेतन सहित दिया जाए।
मिड-डे मील वर्कर्स को नियुक्ति पत्र व पहचान पत्र भी दिए जाएं। 45वें श्रम सम्मेलन की सिफारिशों को लागू किया जाए, जिसमें ग्रेच्युटी, पेंशन, प्रॉविडेंट फंड, मेडिकल सुविधा, सामाजिक सुरक्षा लाभ दिए जाएं। बलविंद्र कौर ने कहा कि प्रत्येक स्कूल में दो मिड-डे मील वर्कर्स नियुक्त किए जाएं। मानदेय मेें केंद्र सरकार द्वारा वर्ष 2013 से 2000 रुपये की घोषणा को लागू किया जाए। मिड-डे मील वर्कर्स को सरकारी कर्मचारी घोषित किया जाए।
वहीं सीटू के जिला सचिव गुरनाम सिंह ने कहा कि आंगनबाड़ी वर्कर्स एवं हेल्पर्स को हरियाणा की तर्ज पर क्रमश: 7500 व 4000 मासिक वेतन दिया जाए। उन्होंने कहा कि महाराष्ट्र, त्रिपुरा की तर्ज पर सेवानिवृत्ति पर पेंशन की सुविधा दी जाए। दूसरे राज्यों की तरह त्योहार भत्ता, अन्य सुविधाओं की भी मांग रखी गई।
उन्होंने कहा कि यदि शीघ्र मांगों को लेकर सरकार ने कोई कदम न उठाया तो उग्र आंदोलन शुरू किया जाएगा। इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने एडीएम राजेश मारिया के माध्यम से सरकार को मांगपत्र भी भेजा। इस अवसर पर सुरेंद्र कुमार, सुनीता, अनुराधा, नीलम जसवाल, नरेश शर्मा, नरेश भुल्लर, बलविंद्र कौर, नरेश भुल्लर सहित अन्य उपस्थित रहे।