नारी (ऊना)। हुनर, मेहनत और आत्मनिर्भर बनने का संकल्प हो तो घर से भी रोजगार की राह निकाली जा सकती है। गांव लोहारा की नंदिनी ने इसे साबित कर दिखाया है। उन्होंने आधुनिक मशीन की मदद से पत्तल और डूने बनाने का काम शुरू किया और आज इस स्वरोजगार से हर महीने करीब 20 हजार रुपये कमा रही हैं। खास बात यह है कि नंदिनी खुद आर्थिक रूप से मजबूत बनने के साथ क्षेत्र की पांच अन्य महिलाओं को भी इस काम का प्रशिक्षण दे रही हैं, ताकि वे अपने पैरों पर खड़ी हो सकें।
नंदिनी ने पत्तल-डूने तैयार करने के लिए आधुनिक तकनीक वाली मशीन खरीदी है। इसमें विशेष प्रकार के पत्तों से बने कच्चे माल को सांचों की मदद से आकार देकर उत्पाद तैयार किए जाते हैं। इस काम के लिए वह दिल्ली और अन्य शहरों से कच्चा माल मंगवाती हैं। हालांकि जंगलों में भी इस तरह का पत्ता उपलब्ध होता है, लेकिन उसे एकत्र करने और तैयार करने में अधिक मेहनत लगती है। ऐसे में बाहर से कच्चा माल मंगवाकर मशीन से उत्पादन करना उनके लिए सुविधाजनक साबित हो रहा है।
बाजार से कम कीमत पर कर रहीं बिक्री
नंदिनी के अनुसार, बाजार में 11 इंच की पत्तल का एक पैकेट 120 रुपये में मिलता है जबकि वह 12 इंच की पत्तल 110 रुपये में बेच रही हैं। इसी तरह बाजार में डोने का एक सैकड़ा करीब 75 रुपये में बिकता है जबकि वह इसे 50 रुपये प्रति सैकड़ा उपलब्ध करवा रही हैं। कम कीमत और बेहतर आकार के कारण उनके उत्पादों की स्थानीय स्तर पर अच्छी मांग है। कई ग्राहक सीधे उनसे खरीदारी करते हैं जबकि कुछ लोग ऑनलाइन माध्यम से भी ऑर्डर देते हैं।
नंदिनी बताती हैं कि पत्तल-डूने बनाने का काम पूरे साल किया जा सकता है। इससे नियमित आमदनी का अवसर मिलता है। नंदिनी का मानना है कि ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाओं में हुनर की कमी नहीं है।