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Una News: मैड़ी में पवित्र निशान साहिब चढ़ाने के लिए पहुंचे लाखों श्रद्धालु

Tue, 03 Mar 2026 12:11 AM IST
शिमला ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊना
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डेरा बाबा वडभाग सिंह जी बेरी साहिब। संवाद
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अंब(ऊना)। आओ संगतों खेडो बाबे दीयां होलियां... भजन। पवित्र निशान साहिब चढ़ाने के साथ ही बाबा जी की जय जयकार और जो बोले सो निहाल के गगनभेदी जयकारों के साथ हर तरफ रंग और गुलाल के साथ मंगलवार को श्रद्धालु मैड़ी मेले में बधाई देंगे। इस मौके के साक्षी बनने के लिए लाखों लोग मैड़ी पहुंच चुके हैं। प्रसिद्ध धार्मिक स्थल डेरा बाबा बड़भाग सिंह मैड़ी में मंगलवार को होली के पावन अवसर पर पवित्र निशान साहिब चढ़ाने की रस्म पूरी श्रद्धा के साथ अदा की जाएगी। इस खास मौके पर मुख्य आकर्षण चरण गंगा, बेरी साहिब, तप स्थान गुरुद्वारा मंजी साहिब और कुज्जासर रहेंगे, जहां सुबह के समय विधि-विधान के साथ नए झंडे स्थापित किए जाएंगे। इस धार्मिक आयोजन में शामिल होने के लिए देश और विदेश से लाखों श्रद्धालु मैड़ी पहुंच चुके हैं। पूरा क्षेत्र बाबा जी के जयकारों और धार्मिक उद्घोषों से गूंज रहा है।
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धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, बाबा बड़भाग सिंह जी होली के दिन मैड़ी में साक्षात रूप से विराजमान होते हैं। परंपरा के तहत पुराने चोले को उतारकर निशान साहिब को पंचामृत और गंगाजल से स्नान कराया जाता है जिसके बाद करीब 72 फीट ऊंचे झंडे पर नया चोला चढ़ाया जाता है। श्रद्धालु अपनी मन्नतें पूरी होने की कामना के साथ झंडे पर रुमाल और खिलौने बांधते हैं। निशान साहिब चढ़ाने की इस प्रक्रिया के दौरान श्रद्धालुओं की भारी भीड़ उमड़ती है और रस्म पूरी होने के बाद संगत एक-दूसरे को गुलाल लगाकर होली की बधाई देती है।
इस स्थान का इतिहास करीब 300 साल पुराना बताया जाता है, जब बाबा बड़भाग सिंह जी ने यहां तपस्या की थी। कहा जाता है कि उन्होंने जनहित के लिए वीर नाहर सिंह की शक्तियों को वश में किया था। इसके बाद से ही चरणगंगा और नाहर सिंह के धूने पर माथा टेकने की परंपरा चली आ रही है। भक्त चरणगंगा के पवित्र जल में स्नान करते हैं। मान्यता है कि स्नान से मानसिक कष्टों और नकारात्मक बाधाओं से मुक्ति मिलने की मान्यता है। इसके अलावा होली के दो दिन बाद वितरित होने वाले ''पंजे के प्रसाद'' का भी विशेष महत्व है जिसके लिए बड़ी संख्या में श्रद्धालु वहां रुकते हैं। प्रशासन और धौलीधार सेवा सोसायटी ने श्रद्धालुओं की भारी भीड़ को देखते हुए सुरक्षा और सुविधाओं के पुख्ता इंतजाम किए हैं।
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प्राचीन बेरी के पेड़ से श्रद्धालुओं की आस्था
डेरा बाबा बड़भाग सिंह मैड़ी में स्थित विभिन्न धार्मिक स्थलों का अपना विशेष महत्व और पौराणिक इतिहास है। बेरी साहिब वह स्थान है जहां बाबा जी की समाधि स्थित है। यहां एक प्राचीन बेरी का पेड़ भी मौजूद है जिसके बारे में मान्यता है कि इस पर वीर नाहर सिंह का वास था। वार्षिक होली मेले के अलावा बैसाखी और रक्षाबंधन पर भी यहां देश-विदेश से लाखों श्रद्धालु दर्शन के लिए पहुंचते हैं।
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तप स्थान मंजी साहिब
मंजी साहिब को बाबा जी के तप स्थान के रूप में जाना जाता है। कहा जाता है कि बाबा जी ने यहां एक छोटी सी कुटिया में लगभग 17 साल और आठ महीने तक कठोर तपस्या की थी और यहीं उन्हें आत्मज्ञान प्राप्त हुआ था। इसी कारण श्रद्धालुओं के लिए यह स्थान अत्यंत पवित्र और ऊर्जा से भरपूर माना जाता है।
धौलीधार स्थित श्री चरणगंगा में स्नान करने और वीर नाहर सिंह जी के धूने के दर्शन करने का विशेष फल बताया गया है। पौराणिक कथाओं के अनुसार जब बाबा जी ने वीर नाहर सिंह को अपने वश में किया, तब नाहर सिंह ने लोगों के दुख दूर करने का वचन दिया था। श्रद्धालुओं का विश्वास है कि यहां के पवित्र जल में स्नान करने और धूने की भभूति घर ले जाने से नकारात्मक शक्तियों और प्रेत बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
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