आरोप है कि बैंक अधिकारियों ने गिरवी रखी गई प्रॉपर्टी की आरक्षित मूल्य तय करने से जुड़े मूल्यांकन रिकाॅर्ड में हेराफेरी की। शिकायतकर्ता ने एफआईआर में यह भी आरोप लगाया है कि आरबीआई की गाइडलाइन और कोविड-19 के दौरान लागू मोरेटोरियम के बावजूद वर्ष 2021 में लोन को गलत तरीके से एनपीए घोषित कर दिया गया। इसके चलते मामला हाईकोर्ट हिमाचल प्रदेश और डेब्ट रिकवरी ट्रिब्यूनल, चंडीगढ़ तक पहुंच गया। शिकायतकर्ता ने आरटीआई के माध्यम से जानकारी मांगी, जिसमें खुलासा हुआ कि केसीसीबी की रिकवरी शाखा से उसकी लोन फाइल के कई महत्वपूर्ण पेज, विशेषकर रिजर्व प्राइस फिक्सेशन और वैल्यूएशन से संबंधित नोटिंग्स गायब हैं। पुलिस अधीक्षक अमित यादव ने बताया कि मामले में एसएचओ सदर को लाइन हाजिर किया गया है। जांच से जुड़े कुछ अहम पहलुओं पर उनसे स्पष्टीकरण मांगा गया है।