किसानों ने बताया कि आलू की फसल तैयार होने में करीब साढ़े तीन महीने का समय लगता है। इस दौरान बीज, खाद, कीटनाशक, सिंचाई और अन्य कृषि कार्यों पर हजारों रुपये खर्च करने पड़ते हैं। कई किसानों ने इस सीजन में लाखों रुपये निवेश किए, लेकिन फसल बेचने पर उन्हें लागत का भी पूरा पैसा नहीं मिल पा रहा है। ऊना जिले में करीब 1000 हेक्टेयर भूमि पर आलू की खेती की जाती है और यह जिला प्रदेश में आलू उत्पादन के लिए जाना जाता है। बावजूद पिछले कुछ वर्षों से लगातार किसानों को इस फसल में घाटा झेलना पड़ रहा है। किसान गुरपाल चौधरी का कहना है कि दिन-रात मेहनत करने के बाद भी जब फसल का सही मूल्य नहीं मिलता तो हिम्मत टूट जाती है।
इस फसल पर जल्द समर्थन मूल्य तय करना जरूरी है। इस बार मौसम ने पूरी फसल खराब कर दी। पहले बारिश ने नुकसान किया, फिर ब्लाइट रोग लग गया। किसान नीरज कुमार ने कहा कि हमने कर्ज लेकर खेती की थी, लेकिन मंडी में दाम बहुत गिर गए।