साल भर के लिए विदा हुए गुग्गा, रिपोह और चकसराय के गुग्गा मंदिरों में जुटी भारी भीड़
संवाद न्यूज एजेंसी
संतोषगढ़ (ऊना)। रक्षा बंधन से कृष्ण जन्माष्टमी तक घर-घर जाकर दर्शन देने वाले गुग्गा जाहरपीर रविवार को अपने निवास गुग्गा माड़ी लौट गए। शनिवार को उनकी फेरी का अंतिम दिन रहा। रविवार को गुग्गा नवमी पर हजारों श्रद्धालु मंदिरों में जुटे और रोट प्रसाद चढ़ाकर पूजा-अर्चना की।
रिपोह मिसरा गांव के 1897 में बने मंदिर सहित पेखूबेला, मकरैड, डंगोली और संतोषगढ़ के मंदिरों में भी धार्मिक कार्यक्रम हुए। मान्यता है कि ऊना जिले के चकसराय स्थित गुग्गा मंदिर का विशेष महत्व है। यहीं से गुग्गा नवमी पर छिंज मेलों की शुरुआत होती है। लोग मंदिर में अनाज अर्पित करते हैं। गुग्गा को सर्पों का देवता माना जाता है। मान्यता है कि उनकी कृपा से सर्पदंश का विष उतर जाता है और श्रद्धालुओं की मनोकामनाएं पूरी होती हैं। भाद्रपद कृष्ण नवमी को उनका जन्मदिन मनाया जाता है।