संवाद न्यूज एजेंसी
हरोली (ऊना)। इतना बड़ा संसार बनाकर परमात्मा गृहस्थ नहीं बन जाता तो एक छोटा सा घर बना कर एक आदमी गृहस्थ बन जाए, यह पागलपन नहीं तो और क्या है। इतने विराट संसार का जाल खड़ा कर अगर परमात्मा वैसे का वैसा रह जाता है जैसा था, तो हम एक छोटी सी दुकान चला कर परेशान हो जाते हैं। जब हम अपने कर्म से तादात्म्य बना लेते हैं, तभी बंधन निर्मित होता है। ये अमृत वचन श्रीमद् भागवत कथा के प्रथम दिवस में परम श्रद्धेय अतुल कृष्ण महाराज ने सलोह कुटिया आश्रम ऊना में व्यक्त किए।
उन्होंने कहा कि परमात्मा बेअंत है, उसे आंकड़ों के तराजू में नहीं तौला जा सकता। प्रतिपल अदृश्य दृश्य में रूपांतरित होता रहता है और दृश्य अदृश्य में खोता चला जाता है। ठीक ऐसे ही जैसे हमारी सांस भीतर गई और बाहर आई। संपूर्ण सृष्टि ऐसे ही सांस ले रही है। प्रकृति की इस लीला को जो जानते हैं, वह इसे सृष्टि एवं प्रलय के रूप में देखते हैं।
इस अवसर पर सलोह कुटिया के यश गिरी ने कहा कि संसार परमात्मा के लिए एक स्वप्न से ज्यादा नहीं है। हमारे लिए भी संसार एक स्वप्न हो जाए, तो हम भी परमात्मा से भिन्न नहीं रह जाते। भक्ति सिद्धांत का पहला सूत्र है कि सब कुछ परमात्मा का है। जो जन्म हमारी इच्छा के बिना है, उसे मेरा कहना एकदम नासमझी है। जिस जन्म के पहले मुझसे पूछा ही नहीं जाता कभी उसे मेरा कहने का क्या अर्थ है। जिस जन्म में मेरी मर्जी नहीं है, वह जन्म मेरा नहीं। बताया कि श्रीमद् भागवत कथा का समय प्रतिदिन 11 से दो बजे तक रहेगा। कथा के पश्चात प्रतिदिन भंडारे का भी आयोजन किया जा रहा है।