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Una News: कुदरत और जानवरों के दोहरे प्रहार से किसान बेहाल

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खेतों में पानी भर जाने से मक्की की फसल प्रभावित
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बची फसल को दिन में बंदर और रात को जंगली सूअर उजाड़ रहे
किसानों को करना पड़ रहा दिक्कतों का सामना
संवाद न्यूज एजेंसी
बंगाणा (ऊना)। उपमंडल बंगाणा क्षेत्र में अगस्त माह से हो रही लगातार भारी बारिश ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। खेतों में पानी भर जाने से किसानों की फसलें प्रभावित हुई हैं। लोगों को रोज़ी-रोटी के लाले पड़ गए हैं। किसानों की आख़िरी उम्मीद उनकी फसल होती है, लेकिन इस बार पहले कुदरत ने कहर बरपाया और अब जंगली जानवर फसलों को तबाह करने में लगे हुए हैं। दिन में बंदरों और रात को जंगली सूअर और नीलगाय का आतंक मक्की के खेतों को उजाड़ रहा है। कृषि विषयवाद विशेषज्ञ डॉ. सतपाल धीमान का कहना है कि क्षेत्र में पहले ही फसलें प्राकृतिक आपदा से प्रभावित हुई हैं, अब जंगली जानवरों ने किसानों के संकट को और बढ़ा दिया है। उन्होंने किसानों को सलाह दी है कि फसलों को बचाने के लिए फोर्ट नामक दवा का छिड़काव करें और पुड़िया बांधें, जिससे उसकी गंध से जानवर फसल को कम नुकसान पहुंचाते हैं। इस समस्या को लेकर किसानों और ग्रामीणों ने अपने विचार कुछ प्रकार साझा किए।
1. बडोआ की बुजुर्ग महिला भगवती देवी कहती हैं कि पहले महंगे ट्रैक्टर से जुताई, फिर महंगे बीज, खाद और खरपतवार नियंत्रण की दवाइयों पर खर्च हुआ। अब जब फसल तैयार हुई तो जंगली जानवरों ने खेतों में कहर बरपा दिया।
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2. छपरोह के बलवंत सिंह वर्मा का कहना है कि कुदरत की मार और जंगली जानवरों के आतंक से परेशान होकर किसान धीरे-धीरे खेतीबाड़ी से मुख मोड़ते जा रहे हैं।
3. कोट में अरलू के समाजसेवी और किसान रछपाल सिंह राणा कहते हैं -हम चाहे बाहर भी रहते हों, लेकिन खेतीबाड़ी से जुड़े हैं। पहले फसल से घर का खर्च और अतिरिक्त जरूरतें पूरी हो जाती थीं। अब मेहनत करने के बावजूद उतना लाभ नहीं मिलता।
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4. पिपलू के युवा राज कुमार मनकोटिया का कहना है कि खेती में खर्च ज़्यादा और आमदनी कम हो रही है। मक्की की फसल पर जितना खर्च होता है, उसका आधा भी किसानों को वापस नहीं मिलता। इसी कारण युवा पीढ़ी धीरे-धीरे खेती से दूरी बना रहे हैं।
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