39 किसानों से 41.66 मीट्रिक टन प्राकृतिक गेहूं खरीला गया
ऊना में प्राकृतिक खेती बनी किसानों की आर्थिक मजबूती का आधार
रसायन मुक्त अन्न और किसानों को बढ़ी आय का लाभ
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। हिमाचल प्रदेश सरकार की प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की नीति अब ज़मीनी स्तर पर प्रभावी होती दिख रही है। इसका मुख्य उद्देश्य रसायन मुक्त अन्न का उत्पादन कर पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ किसानों की आय में वृद्धि करना है। ऊना जिले में अब तक 16,858 किसान प्राकृतिक खेती से जुड़ चुके हैं। यह विधि न केवल पर्यावरण के अनुकूल है, बल्कि इससे किसानों की लागत घटने के साथ आय में भी उल्लेखनीय इजाफा हुआ है।
प्राकृतिक खेती का किसानों को मिला उचित मूल्य
आत्मा परियोजना के निदेशक डॉ. वीरेंद्र बग्गा के अनुसार बीते सीजन में ऊना जिला के 39 किसानों से 41.66 मीट्रिक टन प्राकृतिक गेहूं खरीदा गया। अंब ब्लॉक से 4.91 मीट्रिक टन, बंगाणा ब्लॉक 2.35 मीट्रिक टन, गगरेट ब्लॉक 16.00 मीट्रिक टन, हरोली ब्लॉक, 11.15 मीट्रिक टन, ऊना ब्लॉक से 7.24 मीट्रिक टन गेहूं खरीदा गया। गेहूं की खरीद 60 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से की गई, जिससे किसानों को 25,83,341 की राशि सीधे बैंक खातों में प्रदान की गई।
पिछले वर्ष जिले में 15 किसानों से 11.15 मीट्रिक टन प्राकृतिक मक्की खरीदी गई। अंब ब्लॉक से 1.29 मीट्रिक टन, गगरेट ब्लॉक 4.20 मीट्रिक टन, हरोली ब्लॉक: 1.49 मीट्रिक टन, ऊना ब्लॉक से 4.15 मीट्रिक टन मक्की की खरीद की गई। मक्की की खरीद 30 रुपये प्रति किलोग्राम की दर पर की गई, जिससे किसानों को 3,34,542 की राशि दी गई। वर्तमान में सरकार ने मक्की का न्यूनतम समर्थन मूल्य 40 रुपये प्रति किलोग्राम कर दिया है।
2,000 हेक्टेयर से अधिक भूमि पर हो रही प्राकृतिक खेती
ऊना जिले में कुल 2,092 हेक्टेयर भूमि पर किसान प्राकृतिक तकनीक से खेती कर रहे हैं। जिले में कुल 48,006 कृषकों में से 16,858 किसान प्रशिक्षण लेकर इस प्रणाली को अपना चुके हैं और लाभ कमा रहे हैं।
सरकार की योजनाएं
सरकार प्राकृतिक खेती से जुड़ने वाले किसानों को विभिन्न प्रकार की सब्सिडी प्रदान कर रही है:
देसी गाय खरीद पर अधिकतम 25,000 या 50% सब्सिडी
गाय परिवहन पर 5,000 तक सब्सिडी
प्लास्टिक ड्रम पर 75% अनुदान
साइकिल हल पर 1,500 या 50% अनुदान
गाय के लिए पक्का फर्श बनाने पर 80% या अधिकतम 8,000 तक अनुदान
प्राकृतिक खेती की यह नीति न केवल हिमाचल प्रदेश को रसायन-मुक्त कृषि की ओर ले जा रही है, बल्कि किसानों के जीवन में भी सकारात्मक परिवर्तन ला रही है।