क्षेत्रीय अस्पताल में उपचार के लिए हर माह पहुंच 20 से 30 बच्चे
नई तकनीक के प्रयोग से बच्चों के स्वास्थ्य पर पड़ रहा असर
लगातार स्क्रीन देखने से सिरदर्द, आंखों में दर्द और थकान जैसे लक्षण आ रहे सामने
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। मोबाइल फोन और कंप्यूटर के अत्यधिक उपयोग से बच्चों की आंखों में सूखेपन की समस्या बढ़ती जा रही है। क्षेत्रीय अस्पताल में हर माह ऐसे 20 से 30 बच्चे उपचार के लिए पहुंच रहे हैं। बच्चों में सिरदर्द, आंखों में दर्द और जलन जैसी समस्याएं तेजी से बढ़ रही हैं। आज के समय में पढ़ाई और मनोरंजन के लिए मोबाइल व कंप्यूटर का प्रयोग बढ़ गया है। लंबे समय तक स्क्रीन पर नजरें टिकाए रखने से बच्चों की आंखें प्रभावित हो रही हैं। कम उम्र में ही आंखें कमजोर होने का एक प्रमुख कारण स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग माना जा रहा है। अस्पताल में हर महीने आंखों से संबंधित 20 से 30 मरीज पहुंचते हैं, जिनमें बच्चों की संख्या सबसे अधिक है। वहीं, बुजुर्गों में मोतियाबिंद की समस्या ज्यादा देखने को मिल रही है, जबकि बच्चों की आंखों में ड्राइनेस और रिफ्रेक्टिव एरर की समस्या बढ़ रही है।
नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. अंकुश शर्मा के अनुसार अधिकांश बच्चों की आंखों में ड्राइनेस की समस्या पाई जा रही है। तकनीकी उपकरणों के अधिक प्रयोग से यह समस्या और गंभीर हो रही है। लगातार स्क्रीन देखने से सिरदर्द, आंखों में दर्द और थकान जैसे लक्षण भी सामने आते हैं।
ऐसे करें बचाव
बच्चों को मोबाइल का उपयोग कम से कम करना चाहिए
अंधेरे में स्मार्टफोन का उपयोग बिल्कुल न करें
फोन या कंप्यूटर का लगातार उपयोग करने से बचें, बीच-बीच में ब्रेक लें
स्क्रीन देखते समय बार-बार पलकें झपकनी चाहिए ताकि आंखों में नमी बनी रहे।
आंखों में दर्द या जलन महसूस हो तो तुरंत विशेषज्ञ से सलाह लें
इन उपायों से आंखों से संबंधित समस्याओं से काफी हद तक बचा जा सकता है।