सड़कों पर दनदनाते टिपरों पर लोगों ने जताया रोष
कहा, प्रशासन की सख्ती बेअसर, प्रतिबंधित समय में भी दौड़ रहे टिपर
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। करीब 12 साल पहले हिमाचल पथ परिवहन निगम से सेवानिवृत्त हुए बडसाला गांव के सतीश कुमार के घर शुक्रवार सुबह मुसीबतों का पहाड़ टूट पड़ा। उनका इकलौता बेटा विशाल शर्मा झलेड़ा चौक के पास सड़क हादसे का शिकार हो गया और मौके पर ही उसने दम तोड़ दिया। विशाल अपने पीछे वृद्ध माता-पिता को छोड़ गया। बेटे के अचानक जाने से माता पिता बेसुध हो गए। पिता ने जैसे-तैसे हौसला जुटाया और शव लेने ऊना अस्पताल पहुंचे लेकिन शव की हालत भी ऐसी नहीं रही कि बेटे का अंतिम बार चेहरा देख पाएं। टिपर की चपेट में आने से विशाल का चेहरा और सिर बुरी तरह कुचले गए। विशाल ने हेलमेट भी पहन रखा था। लेकिन, विशालकाय टिपर का टायर सिर से गुजरने पर हेलमेट भी जवाब दे गया। बताया जा रहा कि 41 वर्षीय विशाल शर्मा अविवाहित थे। वह अपने पिता सतीश कुमार और माता निशा भारद्वाज के साथ बडसाला गांव में स्थित अपने घर में रहता था। विशाल की बहन चीनू शर्मा की कई साल पहले शादी हो गई थी। विशाल की शादी में हो रही देरी को लेकर परिवार को मात्र मलाल रहा, लेकिन यह कोई नहीं जानता था कि विशाल इस तरह अचानक साथ छोड़ जाएगा। उधर, स्थानीय लोगों ने प्रशासन की ओर से प्रतिबंधित समय के दौरान भी सड़कों पर दौड़ रहे टिपरों के खिलाफ रोष जाहिर किया। लोगों का कहना है कि जब प्रशासन ने सुबह आठ से साढ़े दस और शाम को छह से नौ बजे तक टिपरों की आवाजाही पर प्रतिबंध लगाया हुआ है तो रेत व अन्य खनन सामग्री लेकर उनकी आवाजाही क्यों नहीं रुक रही। क्या मात्र आदेश जारी करना ही प्रशासन का कार्य रह गया है। लोगों ने कहा कि प्रशासन केवल ट्रैक्टर ट्रॉली वालों पर कार्रवाई में जुटा है। जबकि, समस्या की असली जड़ टिपर हैं।
कोट्स
पुलिस अधीक्षक राकेश सिंह ने बताया कि अवैध खनन के खिलाफ पुलिस की टीमें लगातार सक्रिय हैं। कार्रवाई जारी है। जहां तक बात शु्क्रवार को हुए हादसे की है तो उसमें पुलिस की जांच जारी है। आरोपी टिपर चालक के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया है।