दवाइयां का स्टॉक खत्म, मरीजों को मजबूरन बाहर से लेनी पड़ रहीं दवाइयां
सात माह से नहीं मिला दवाइयों का स्टॉक
रोगी कल्याण समिति की कार्यप्रणाली पर खड़े हो रहे सवाल
आशुतोष डोगरा
ऊना। जिले के सबसे बड़े आयुर्वेदिक अस्पताल में ही अगर मरीजों को दवाइयां नहीं मिल रही हैं तो वेलनेस केंद्रों की स्थिति का सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में उपचार के लिए आने वाले मरीजों को इक्का-दुक्का दवाइयां ही मिल पा रही हैं। अधिकतर दवाइयों के लिए मरीजों को बाजार का रुख करना पड़ रहा है, जिससे आम जनता परेशान है। जनता को आयुर्वेद और योग से जोड़ने के लिए सरकारों की ओर से कई योजनाएं चलाई जा रही हैं। टेली मेडिसिन सुविधा से लेकर ई-संजीवनी जैसी आधुनिक तकनीकों के माध्यम से लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने के प्रयास किए जा रहे हैं। दूसरी ओर आयुर्वेदिक अस्पतालों की हालत यह है कि मरीजों को बुनियादी दवाइयां भी उपलब्ध नहीं हो पा रही हैं। जिला आयुर्वेदिक अस्पताल में विभिन्न उपमंडलों से रोजाना बड़ी संख्या में मरीज उपचार के लिए पहुंचते हैं। चिकित्सक से जांच के बाद पर्ची पर लिखी दवाइयों को लेने के लिए जब मरीज दवा काउंटर पर पहुंचते हैं तो उन्हें अधिकतर दवाइयां बाहर से खरीदने के लिए कहा जाता है। अस्पताल को दिसंबर 2024 में आखिरी बार सरकार की सिविल सप्लाई के तहत दवाइयों का स्टॉक मिला था, जो अब लगभग समाप्त हो चुका है। बीते सात माह से दवाइयों की कोई नई सप्लाई नहीं हुई है।
रोगी कल्याण समिति की कार्यप्रणाली पर उठ रहे सवाल
अस्पताल में रोगियों के हितों के लिए रोगी कल्याण समिति का गठन किया गया है। इस समिति को सिविल सप्लाई के माध्यम से और आवश्यकता पड़ने पर अपने स्तर पर दवाइयों की खरीद का अधिकार भी है। लेकिन, प्रबंधन की लचर व्यवस्था के चलते इस विकल्प का भी प्रयोग नहीं किया गया, जिससे समिति की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो रहे हैं।
सरकार की तरफ से सिविल सप्लाई के तहत भेजा दवाइयों का स्टाॅक लगभग खत्म है। उच्च अधिकारियों को इस समस्या के बारे में अवगत करवाया गया है। समस्या का समाधान करने के प्रयास किए जा रहे हैं। -डॉ. किरण शर्मा, जिला आयुर्वेद अधिकारी, ऊना