ऊना। पूर्व भाजपा सरकार के समय जिला ऊना के घंडावल में बनाया गया बैंबू प्रोजेक्ट चार साल भी शुरू नहीं हो पाया है। ग्रामीण आजीविका को बढ़ावा देने, बांस आधारित उद्योग विकसित करने और स्थानीय युवाओं, महिलाओं व कारीगरों को रोजगार से जोड़ने के उद्देश्य से शुरू किए जाने बैंबू प्रोजेक्ट को चलाने को लेकर जिला प्रशासन ने अपने हाथ खड़े कर दिए हैं। प्रशासन करीब चार वर्षाें से इस प्रोजेक्ट को चलाने को लेकर माथापच्ची करता रहा। परियोजना का भवन बनकर तैयार हो चुका है और बैंबू ब्रश बनाने की मशीन भी स्थापित की जा चुकी है। परियोजना के संचालन की जिम्मेदारी स्वां महिला फेडरेशन को भी दी गई। इसे लेकर कुछ महिलाओं को प्रशिक्षण भी दिया गया लेकिन इस सब के बावजूद जिला ऊना के घंडावल की करीब चार करोड़ रुपये की महत्वाकांक्षी परियोजना चार साल बाद भी अपने मूल उद्देश्य तक नहीं पहुंचा पाया।
अब जिला प्रशासन ने विवश होकर इस प्रोजेक्ट को निजी हाथों में सौंप दिया है। हैरानी की बात है कि करीब एक वर्ष पहले निजी कंपनी ने इस प्रोजेक्ट को किराये पर लिया है। वह निजी कंपनी भी अभी तक इसे शुरू नहीं कर पाई है।
वर्ष 2022 में घंडावल में करीब चार करोड़ रुपये की लागत से इस प्रोजेक्ट का शिलान्यास किया गया था। परियोजना के तहत बांस आधारित फर्नीचर निर्माण इकाई, ट्रीटमेंट एवं सीजनिंग प्लांट, बैंबू डिपो, नेचर पार्क, कैफे, शॉपिंग कॉम्पलेक्स, प्रशिक्षण केंद्र और बैंबू नर्सरी विकसित की जानी थी। दावा था कि इससे स्थानीय किसानों की आय बढ़ेगी और ऊना के बांस उत्पादों को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान मिलेगी।
उपायुक्त जतिन लाल से सीधे सवाल
सवाल: सर, बैंबू विलेज प्रोजेक्ट अखिर क्यों शुरू नहीं हो पाया?
जवाब: इसमें सबसे बड़ी परेशानी कच्चे माल और बाजार में डिमांड की कमी सामने आ रही थी।
सवाल: अब क्या इस प्रोजेक्ट को चलाने के लिए कोई समाधान निकाला है?
जवाब: जी हां, अब इस प्रोजेक्ट को किराये पर दे दिया है। इसे लेकर उद्योग विभाग को नोडल एजेंसी बनाया गया है।
सवाल: जिस कंपनी को टेंडर पर दिया गया, उसने भी इस प्लांट को शुरू नहीं किया है?
जवाब: इसे लेकर कंपनी को स्पष्ट बोला है कि काम शुरू नहीं करना है तो इसका दाेबारा टेंडर कर देंगे।
दस दिनों के भीतर बैंबू विलेज प्रोजेक्ट के तहत बनाई गई इकाई को शुरू कर दिया जाएगा। बिजली से संबंधित कुछ दिक्कतें थीं, जिन्हें दूर किया जा रहा है।
-अंशुल धीमान, संयुक्त निदेशक उद्योग विभाग