घनारी (ऊना)। जन्म और मृत्यु का रिकॉर्ड पूर्व की भांति पंचायतों में ही रखने की मांग जोर पकड़ रही है। क्षेत्र के कई पंचायत प्रधानों ने बताया कि पूर्व में यह रिकॉर्ड पंचायतों में ही रखा जाता था और ग्रामीणों को जरूरत पड़ने पर पंचायत सचिव ही जन्म-मृत्यु संबंधित दस्तावेज मुहैया करवाते थे। वर्ष 2010 से पहले का सारा रिकॉर्ड सीएमओ कार्यालय ऊना में स्थानांतरित कर दिया गया है। नतीजतन ग्रामीणों को दस्तावेज हासिल करने के लिए जिला मुख्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। इसमें न केवल उनका समय बर्बाद हो रहा है बल्कि उन्हें कई तरह की परेशानियों का भी सामना करना पड़ता है।
ग्राम पंचायत अंबोटा के पूर्व प्रधान एवं भारतीय किसान संघ (सर्व) के प्रदेश अध्यक्ष चमेल सिंह ने इस व्यवस्था को जनविरोधी करार दिया। उन्होंने कहा कि एक तरफ पड़ोसी राज्य पंजाब की सरकार है, जहां विभागों के अधिकारी व कर्मचारी लोगों के घरों में जाकर उनके दस्तावेज मुहैया करवा रहे हैं और इधर लोगों को बिना वजह धक्के खाने पड़ रहे हैं। चमेल सिंह ने कहा कि जब सरकार ने पंचायत सचिवों को जन्म और मृत्यु के रजिस्ट्रार की शक्तियां प्रदान की हुई हैं, तो संबंधित रिकॉर्ड भी उन्हीं की कस्टडी में पंचायतों में रहना चाहिए। इस अवसर पर उनके साथ सुरेंद्र पाल सिंह, संजीव ठाकुर तथा सोनू कुमार भी उपस्थित रहे।
ग्राम पंचायत दियोली के उपप्रधान संदीप जसवाल, पूर्व प्रधान राजेश कुमार, ग्रामीणों अशोक जसवाल, सचिन ठाकुर, जितेंद्र कुमार व रवि डढवाल ने भी इस मुद्दे को उठाते हुए कहा कि सरकार को इसे जनहित में रिकॉर्ड को पंचायतों में शिफ्ट करना चाहिए ताकि जरूरतमंद को राहत मिल सके।