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वीकेंड पर हिमाचल आने वालों की भीड़

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बॉर्डर पर अपना ई-पास स्कैन करवाते जिला परिषद पंजाब की चेयरपर्सन - फोटो : Una
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मैहतपुर (ऊना)। हिमाचल-पंजाब की सीमा पर पंजाब में लगाए नाकों को जारी रखने को लेकर लिए प्रदेश सरकार के निर्णय से बॉर्डर पर आ रहे लोगों में से कुछ खुश तो कई नाराज दिखे। उनका कहना है कि कोविड नियमों को लेकर जांच नाकों पर बरती जा रही सख्ती दूसरे राज्यों से आ रही बसों में लागू क्यों नहीं है।
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शनिवार को वीकेंड के चलते दूसरे राज्यों से आ रहे लोग कांगड़ा के ज्वालामुखी मंदिर, ऊना के चिंतपूर्णी, पीरनिगाह, डेरा बाबा बड़भाग सिंह और कई लोग धर्मशाला, मैक्लोडगंज को आ रहे थे। शनिवार को सरहदी जांच नाके शाम 7 बजे तक लगभग 900 वाहन हिमाचल में प्रवेश हुए।
लोगों के मुताबिक क्या निगम की बसों में आ रहे यात्रियों से प्रदेश में कोरोना का खतरा नहीं है। क्या निजी वाहनों से आने वाले लोगों से ही प्रदेश में कोरोना फैलने का ज्यादा डर सरकार को सता रहा है। यह सवाल शनिवार को मैहतपुर बॉर्डर पर पहुंच रहे बाहरी राज्यों के कई पर्यटकों तथा श्रद्धालुओं ने जांच नाकों पर तैनात पुलिसकर्मियों तथा शिक्षकों से किए। पंजाब के तरनतारन से जिला परिषद की चेयरपर्सन हरचरणजीत कौर पति के साथ मैहतपुर बॉर्डर पहुंचीं। उनके पास डबल डोज वैक्सीनेशन का प्रमाण पत्र नहीं था और न ही उन्होंने ई-पास बनाया था। उन्होंने बताया कि वह माता नयना देवी के माथा टेकने के बाद चिंतपूर्णी, ज्वाला जी जा रहे हैं।
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हैरत की बात यह है कि नयना देवी जाते वक्त किसी ने उनसे डबल डोज वैक्सीनेशन का प्रमाण पत्र अज्ञैर ई-पास स्कैन करने को लेकर पूछताछ नहीं की। शिक्षकों से मैडम कुछ देर तक बहसबाजी करती रहीं। गुस्से भरे लहजे में कुछ देर बातचीत करने के बाद उन्होंने अपना मोबाइल दिखाया। इसमें सिंगल वैक्सीनेशन डोज का प्रमाण पत्र था। ई-पास बनाने के बाद उन्हें हिमाचल में एंट्री दी गई। कई श्रद्धालुओं के पास ई-पास तो कई लोगों के पास वैक्सीनेशन का प्रमाण पत्र नहीं था।
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