दुलैहड़ (ऊना)। टाहलीवाल में पेट्रोल पंप के पास वर्ष 2015 में हुए सड़क हादसे में युवक की मौत के मामले में अभियोजन कार चालक पर आरोप साबित नहीं कर सका।
हादसे में घायल दोनों युवकों ने बाइक को कार की टक्कर लगने की बात से इन्कार किया, जबकि पेट्रोल पंप के सुरक्षा गार्ड ने कार को बाइक से टकराते देखने और चालक की पहचान करने से इन्कार कर दिया।
कार के बोनट पर मिले डेंट को भी हादसे से जोड़ने के पुख्ता साक्ष्य नहीं मिले। इन परिस्थितियों में न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम श्रेणी, कोर्ट नंबर-दो ऊना के न्यायाधीश शाविक घई ने आरोपी को बरी कर दिया।
मामला 13 फरवरी 2015 की रात करीब 9 बजे का है। अभियोजन के अनुसार टाहलीवाल पेट्रोल पंप के पास आरोपी कार चला रहा था। आरोप था कि तेज रफ्तार और लापरवाही से कार चलाते हुए उसने सामने से आ रही बाइक को टक्कर मार दी।
बाइक पर तीन युवक सवार थे। टक्कर के बाद बाइक सड़क किनारे खड़े ट्रक से जा टकराई। हादसे में बाइक सवार घायल हुए, जिनमें रोहित की उपचार के दौरान मौत हो गई। पुलिस जांच के बाद मामला अदालत पहुंचा।
अभियोजन ने कुल 17 गवाह पेश किए लेकिन प्रमुख गवाहों की गवाही से उसका पक्ष कमजोर पड़ गया। पेट्रोल पंप के सुरक्षा गार्ड पंकज ने अदालत में बताया कि वह हादसे के बाद मौके पर पहुंचा था। उसने कार को बाइक से टकराते हुए देखने और आरोपी को चालक के रूप में पहचानने से इन्कार किया।
बाइक सवार घायल भानु प्रताप और अरुण कुमार ने भी कार की ओर से बाइक को टक्कर मारने की बात का समर्थन नहीं किया। एक अन्य गवाह ने कार और बाइक के बीच टक्कर होने की बात कही लेकिन उसने भी स्पष्ट किया कि उसने कार चालक को नहीं देखा था।
अदालत के समक्ष यह तथ्य भी आया कि हादसे की सूचना और एफआईआर अगले दिन दर्ज हुई थी। अभियोजन इस देरी का संतोषजनक स्पष्टीकरण नहीं दे सका।
अदालत ने कहा कि केवल हादसा होना या उसमें किसी व्यक्ति की मौत हो जाना आरोपी की आपराधिक लापरवाही साबित करने के लिए पर्याप्त नहीं है। अभियोजन को आरोप संदेह से परे साबित करने होते हैं। पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलने पर अदालत ने आरोपी को बरी कर दिया।