ग्रामीण क्षेत्रों में सड़कों पर खुले में घूम रहे गोवंश की संख्या निरंतर बढ़ रही
लोगों ने कहा- समस्या के हल को लेकर धरातल पर कोई कदम नहीं उठाए गए
संवाद न्यूज़ एजेंसी
मुबारिकपुर (ऊना)। सड़कों पर खुले में घूम रहे गोवंश की संख्या निरंतर बढ़ रही है और विकराल समस्या बन रही है। गोधन के झुंडों में गाय के साथ बैलों की संख्या भी बढ़ रही है। सरकारी तंत्र की तरफ से गोशाला निर्माण को लेकर भी प्रयास किए गए हैं लेकिन धरातल पर अभी तक अधिकतर ग्रामीण स्तर पर कुछ विशेष होता नजर नहीं आया है। जहां गोशाला सरकार या संस्था की ओर से चलाई गई है, वहां अव्यवस्था के चलते समस्याएं आने की शिकायतें रहती हैं। कई बार पशुओं की गिनती या टैग लगाने की कार्रवाई अमल में लाने के प्रयास हुए मगर निरंतर बढ़ रही समस्या से सभी दावे व अभियान बौने नजर आए। खुले में घूम रहे गोधन दुर्घटनाओं का शिकार हो रहा है। वहीं, वाहन चालक भी इसका शिकार हो रहे है।
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समाज सेवी सतीश शर्मा ने कहा कि सरकार और प्रशासन को इस समस्या के प्रति संवेदनशील होकर पुख्ता हल निकालना चाहिए। सरकार की ओर से अधिगृहीत मंदिरों के चढ़ावे से गोशालाओं का निर्माण किया जाना चाहिए। खुले में घूम रहे सभी गोधन को सुरक्षित आश्रय मुहैया कराना चाहिए।
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शहीद भगत सिंह क्लब गगरेट के समाजसेवी शम्मी ने कहा कि आज के समय में गोधन की बेकद्री मुख्य समस्या है। गोधन गोशालाओं के होने के बावजूद सड़कों पर ज्यादा दिखता है। ग्राम पंचायत स्तर पर गोशालाओं को खोला जाना चाहिए व पंचायतों को इनका उत्तरदायित्व सौंपा जाना चाहिए। घायल गोधन के उपचार को लेकर पशुपालन विभाग को तत्काल के निर्देश सरकार को देने चाहिए।
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समाजसेवी अशोक सौंखला मिक्की ने कहा कि देवभूमि में गोधन का सड़कों पर पर घूमना दर्शाता है कि गोशाला प्रबंधन धरातल पर अपने उद्देश्य को लेकर गंभीर नहीं हैं। उनका कहना है कि त्रिस्तरीय पंचायतीराज संस्थाओं में बीडीसी व जिला परिषद को गोधन के सरंक्षण कार्यक्रम से जोड़ा जाना चाहिए। कहा कि गोशालाओं का नियमित निरीक्षण न होना अव्यवस्था का पर्याय बना हुआ है।
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पूर्व पंचायत प्रधान एवं एंटी करप्शन संस्था राष्ट्रीय उपाध्यक्ष किरण लता ने कहा कि खुले में छोड़ा गया गोधन आम जनमानस की ही दूध पीकर छोड़ने की स्वार्थी प्रवृत्ति का नतीजा है। कहा कि गोशालाओं में गोधन के लिए नियमित चारे, स्वास्थ्य जांच की व्यवस्था सुनिश्चित की जानी चाहिए।