ऊना। वार्षिक परीक्षाओं के नतीजे घोषित होने के बाद स्कूलों में दाखिला प्रक्रिया जोरों पर है, लेकिन इस बार शिक्षा सिर्फ ज्ञान अर्जन ही नहीं, बल्कि जेब पर भी भारी पड़ रही है। दाखिला फीस, वर्दी, किताबें, कॉपियां, जूते-जुराबें हर चीज महंगी हो चुकी है।
जानकारी के अनुसार स्कूली जूतों और जुराबों के दाम इस बार पांच प्रतिशत तक बढ़ गए हैं। यानी 500 रुपये वाले जूते अब 530 रुपये में मिल रहे हैं। वहीं, गुणवत्ता के हिसाब से जूतों की कीमत 500 से 1000 रुपये तक पहुंच चुकी है। कई स्कूलों में बच्चों के लिए दो अलग-अलग रंगों के जूते अनिवार्य कर दिए गए हैं, जिससे अभिभावकों को 1000 से 2000 रुपये तक खर्च करने पड़ रहे हैं।
सालभर लगातार पहनने से छह माह में जूते घिस जाने के बाद दोबारा खरीदारी करनी पड़ती है, जिससे यह खर्च और बढ़ जाता है। अभिभावकों ने चिंता जताई कि स्कूलों का ध्यान पढ़ाई की गुणवत्ता से अधिक बच्चों के पहनावे और साज-सज्जा पर रहता है। वंदना कुमार, रोजी देवी, स्नेहलता, अंजली शर्मा, विवेक कुमार, सुनील मनकोटिया और वरिंद्र सिंह ने कहा कि स्कूलों को अतिरिक्त खर्च सीमित कर शिक्षा पर फोकस करना चाहिए। इससे बच्चों का सर्वांगीण विकास होगा और अभिभावकों को आर्थिक बोझ से भी राहत मिलेगी।
दुकानदार बोले, बढ़ती लागत के कारण महंगाई
बढ़ती महंगाई के बीच स्कूल शिक्षा सिर्फ बच्चों के भविष्य के लिए नहीं, बल्कि अभिभावकों की आर्थिक परीक्षा भी बन गई है। दुकानदार राकेश कुमार, नरेश कुमार, रणवीर सिंह, आशीष कुमार और यशपाल शर्मा ने बताया कि हर साल शिक्षा सामग्री के दाम नहीं बढ़ते, लेकिन आपूर्ति महंगी होने पर दामों में इजाफा करना मजबूरी बन जाता है।