विशेषज्ञ बोले, लोगों के सहयोग बगैर समाधान संभव नहीं
विभाग गांवों में लगा रहा जागरूकता शिविर
संवाद न्यूज एजेंसी
नारी (ऊना)। देश के कई हिस्सों में लावारिस और हिंसक कुत्तों की की ओर से बच्चों, महिलाओं और बुजुर्गों को काटने की घटनाएं सामने आई हैं। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा संज्ञान लिया है। इसके बाद प्रदेश सरकार ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं और पशुपालन विभाग ने कार्रवाई शुरू कर दी है। विशेषज्ञ सार्वजनिक स्थलों को लावारिस कुत्तों से मुक्त करने की योजना पर लगातार विचार कर रहे हैं।
वरिष्ठ पशुपालन एवं चिकित्सा अधिकारी डॉ. परमेश डोगरा ने बताया कि जिले के हर गांव में जागरूकता शिविर लगाए जा रहे हैं। पंचायतों की मदद से कुत्तों को रेबीज का टीका लगाया जा रहा है और उनका बधियाकरण करके संख्या घटाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए पंचायतों को कुत्तों को पकड़ने में विभाग की मदद करनी होगी।
बसाल के पशु चिकित्सा अधिकारी अंकुश कुमार ने कहा कि बरनोह और ललड़ी गांवों में बधियाकरण केंद्र खोले गए हैं। जिन पंचायतों में लावारिस कुत्तों से अधिक नुकसान हो रहा है, उन्हें केंद्रों में टीकाकरण और बधियाकरण के लिए कुत्तों को लाना चाहिए। इसके लिए क्षेत्र के लोगों की सक्रिय मदद आवश्यक है।
पूर्व प्रधान सुरेश कुमार ने कहा कि यदि प्रशासन लावारिस कुत्तों की व्यवस्था में असफल रहता है, तो काटे जाने पर पीड़ितों को मुआवजा देना होगा। इसके अलावा कुत्तों को खाना देने वालों की जिम्मेदारी भी तय की जाएगी।
सेवानिवृत्त फार्मासिस्ट दौलत राम का कहना है कि कर्मचारियों की कमी के कारण विभाग अकेला इस समस्या को हल नहीं कर सकता। यदि जनता वास्तव में समाधान चाहती है तो उसे स्वयं सामने आकर विभाग की मदद करनी होगी।