संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। जिला मुख्यालय के साथ लगते बरनोह में स्थापित मुर्रा भैंस प्रजनन केंद्र की गतिविधियों ने रफ्तार पकड़ ली है। केंद्र के लिए नौ शुद्ध नस्ल की मुर्रा भैंसें खरीदी जाने के बाद अब प्रदेश के पशुपालकों को इनके पालन-पोषण का प्रशिक्षण दिया जाएगा।
इसके लिए पशुपालन विभाग ने बरनोह में 11 से 14 नवंबर तक प्रशिक्षण शिविर आयोजित करने की योजना बनाई है, जिसमें 25 पशुपालक हिस्सा लेंगे। अब तक 12 लोगों ने प्रशिक्षण के लिए आवेदन किया है।
जानकारी के अनुसार ऊना जिला के बरनोह में प्रदेश का पहला मुर्रा नस्ल प्रजनन एवं डेयरी फार्म केंद्र और राज्य सरकार के संयुक्त सहयोग से स्थापित किया गया है। प्रारंभिक चरण में इस केंद्र के संचालन के लिए नौ शुद्ध नस्ल की मुर्रा भैंसें उत्तर प्रदेश के बागपत स्थित नेशनल डेयरी डेवलपमेंट सेंटर से लाई गई हैं।
अब इस केंद्र की गतिविधियों को आगे बढ़ाते हुए पशुपालकों को दूध उत्पादन बढ़ाने के उपायों और मौसम के अनुसार इस नस्ल की खुराक संबंधी जानकारी दी जाएगी। 11 से 14 नवंबर तक चलने वाला पहला प्रशिक्षण शिविर प्रतिदिन सुबह 10 बजे से शाम 5 बजे तक संचालित होगा।
विभाग भविष्य में भी ऐसे शिविर आयोजित करता रहेगा। बरनोह मुर्रा प्रजनन फार्म के सहायक निदेशक राकेश भट्टी ने बताया कि फार्म का उद्देश्य शुद्ध नस्ल की भैंसों का प्रजनन करना है।
यहां मुर्रा नस्ल के उच्च गुणवत्ता वाले कटड़े तैयार किए जाएंगे तथा फार्म से प्राप्त वीर्य को संग्रहीत कर विभागीय सीमन केंद्रों के माध्यम से पूरे प्रदेश में कृत्रिम गर्भाधान के लिए वितरित किया जाएगा। चयन प्रक्रिया के दौरान भैंसों की पीढ़ीवार उत्पादन क्षमता और चिकित्सीय जांच को प्राथमिकता दी गई है। भविष्य में फार्म में पशुओं की संख्या बढ़ाकर 50 तक करने का लक्ष्य है।
बता दें कि मुर्रा नस्ल की भैंस औसतन 15 से 20 लीटर दूध प्रतिदिन देती है। प्रारंभिक चरण में उत्पादित दूध स्थानीय डेयरी केंद्रों को उपलब्ध कराया जाएगा, जबकि उत्पादन बढ़ने पर इसे मिल्कफेड को भी आपूर्ति करने की योजना है।