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चिंतपूर्णी मंदिर के सौंदर्यीकरण के लिए 33 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण

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प्रसादम योजना के तहत प्रस्तावित चिंतपूर्णी मंदिर के नए भवन का मॉडल चित्र। संवाद - फोटो : Una
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भरवाईं (ऊना)। प्रसिद्ध शक्तिपीठ चिंतपूर्णी मंदिर के विस्तारीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए अधिग्रहण शुरू हो चुका है। इस दौरान जिन लोगों और दुकानदारों की भूमि का अधिग्रहण होना है उन्हें अभी तक 2.6 करोड़ रुपये की मुआवजा राशि दी जा चुकी है। प्रभावित दुकानदारों की जमीनों की रजिस्ट्री करवाने का कार्य चला हुआ है। मंदिर के विस्तारीकरण और सौंदर्यीकरण के लिए प्रसादम नाम से शुरू की योजना के तहत 34 लोगों की दुकानों का अधिग्रहण किया जाना है। मंदिर के विस्तारीकरण के दौरान 1696 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण किया जाना है।
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अभी तक शनिवार 26 मार्च तक 561 वर्ग मीटर भूमि का अधिग्रहण किया जा चुका है। करीब एक दर्जन भूमि मालिकों की 561 वर्ग मीटर जमीन की रजिस्ट्रियां भाषा एवं संस्कृति विभाग के नाम की जा चुकी हैं। प्रभावित दुकानदारों को अभी तक मंदिर न्यास ने 2.6 करोड़ रुपये मुआवजे के तौर पर दिए हैं। ऐसे में अभी तक 33 प्रतिशत भूमि का अधिग्रहण हो चुका है और बाकी जमीन के अधिग्रहण को लेकर दुकानदार हर रोज जमीन की रजिस्ट्रियां करवा रहे हैं। कुछ दुकानदार ऐसे भी हैं जिन्होंने अपनी जमीनों व समझौते को लेकर कुछ आपत्ति जताकर लिखित रूप से मंदिर प्रशासन को सौंपा है। एसडीएम अंब मनेश यादव की मानें तो बहुत जल्द मंदिर के विस्तार को लेकर भूमि का अधिग्रहण किया जाएगा। कहा कि किसी भी दुकानदार के साथ अन्याय नहीं होने दिया जाएगा। बताते चलें कि केंद्र सरकार की प्रसादम योजना के तहत चिंतपूर्णी मंदिर का विस्तारीकरण कर भव्य मंदिर का निर्माण किया जाना है। इसमें गर्भ गृह को छोड़कर यहां एक ही छत के नीचे श्रद्धालुओं को हर सुविधा मिल पाएगी और भव्य मंदिर बनने के बाद चिंतपूर्णी में आधी से ज्यादा समस्याएं हल हो जाएंगी। इस योजना को लेकर 45 करोड़ की राशि केंद्र सरकार की ओर से मंजूर की गई है, लेकिन पिछले चार साल से ये कार्य अटका हुआ था। एसडीएम अंब मनेश यादव और डीसी ऊना राघव शर्मा की अगुवाई में इस परियोजना को लेकर प्रयास तेज कर दिए गए हैं। एसडीएम अंब मनेश यादव ने कहा कि जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में बाकी बचे दुकानदार भी प्रशासन का सहयोग करें और अपनी जमीनों की रजिस्ट्री भरवाईं उपतहसील में करवाएं ताकि उनको दुकानों का मुआवजा तुरंत दिया जा सके। संवाद
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