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Una News: बाबा बाल आश्रम के महासम्मेलन में दिखेगी किन्नौरी काष्ठ शैली की झलक

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धार्मिक
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राधा- कृष्ण मंदिर कोटला कलां में फरवरी में होगा सालाना समागम
किन्नौर के कारीगर ढाई महीने से तैयार कर रहे देवदार की लकड़ी का सिंहासन
हाटू पीक, बगलामुखी, चामुंडा माता मंदिर में भी इस शैली में कारीगरों ने किया है काम
रितिका शर्मा
ऊना। बाबा बाल आश्रम कोटला कलां में फरवरी में होने वाले सालाना महासम्मेलन महोत्सव में किन्नौरी काष्ठ शैली की झलक दिखेगी। आश्रम में महोत्सव के लिए किन्नौर के कारीगर भव्य सिंहासन तैयार कर रहे हैं। यह सिंहासन देवदार की लकड़ी से तैयार किया जा रहा है। आश्रम में किन्नौर के कारीगर करीब ढाई महीने से इस सिंहासन को तैयार कर रहे हैं। पॉलिश कर सिंहासन को अंतिम रूप दिया जा रहा है। महोत्सव में संत बाबा बाल सिंहासन का शुभारंभ करेंगे।
राधा-कृष्ण मंदिर कोटला कलां में सालाना समागम की तैयारियां चल रही हैं। मंदिर में 12 दिन तक यह समागम चलेगा। वहीं, समागम के लिए संत बाबा बाल के दिशा-निर्देशानुसार काष्ठ शैली में सिंहासन तैयार किया जा रहा है। हिमाचल काष्ठ डिपो से ली गई देवदार की लकड़ी से इसे बनाया जा रहा है। किन्नौरी काष्ठ शैली में इस सिंहासन पर कारीगरों ने मोर के चित्र उकेरे हैं। वहीं, हरे-कृष्णा भी काष्ठ शैली में लिखा गया है। ढाई महीने से तैयार किए जा रहे इस सिंहासन को कारीगर अंतिम रूप देने में जुटे हुए हैं। तैयार होने पर सिंहासन के पर भव्य छत्र लगाया जाएगा।
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कारीगर बिट्टू नेगी, राकेश कुमार, यशुदीप सिंह सिंहासन को तैयार कर रहे हैं। कारीगर बिट्टू नेगी ने बताया कि उन्होंने हाटू पीक, बगलामुखी, चामुंडा माता मंदिर, धर्मशाला के भागसूनाग मंदिर में भी काष्ठ शैली में काम किया है। मंदिर न्यास के सौजन्य से मंदिरों में वे काष्ठ शैली को संजोए हुए हैं। वे पीढ़ी दर पीढ़ी काष्ठ शैली का काम करते आ रहे हैं। उनके पिता और भाई भी काष्ठ शैली में कार्य कर रहे हैं।
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