ऊना। जिला शिक्षा विभाग की ओर से सभी स्कूलों में अध्यापकों और स्टाफ को बायोमीट्रिक मशीनों से हाजिरी लगाने केे लिए अनिवार्य कर दिया गया है। हैरत की बात यह है कि अधिकतर स्कूलों में मशीनें खराब पड़ी हैं। उन्हें रिपेयर करवाने के लिए कोई विकल्प नहीं खोजा जा रहा। विभाग ने स्कूलों को अपने स्तर पर मशीनों की रिपेयरिंग करवाने के निर्देश दिए हैं, लेकिन मशीनों को कहां रिपेयर करवाएं इसको लेकर कोई जानकारी नहीं है।
जानकारी के अनुसार जिले के 80 प्रतिशत से अधिक स्कूलों में लगी बायोमेट्रिक मशीनें काम नहीं कर रही हैं। किसी मशीन में खराबी है तो किसी में सॉफ्टवेयर अपडेट करने की आवश्यकता है। कोरोना काल से पहले स्कूलों में इन मशीनों को लगाया गया, लेकिन संक्रमण के दौर में मशीनों का इस्तेमाल लंबे समय तक नहीं हो पाया। वहीं स्कूलों के लिए मशीनों से जुड़े रखरखाव के लिए अलग बजट का प्रावधान भी नहीं है। इस बीच अब दोबारा इन मशीनों को एक्टिव करने के निर्देश दिए गए हैं। कारण यह है कि सभी स्कूलों की मशीनें ऑनलाइन अटेंडेंस पोर्टल पर रजिस्टर्ड हो चुकी हैं, लेकिन उन पर हाजिरी नहीं लगने के कारण मशीनों की गतिविधि ऑनलाइन पोर्टल पर नजर नहीं आ रही।
कई अध्यापकों का हो चुका है तबादला
ध्यान रहे कि जिस समय स्कूलों में मशीनें लगाई गईं, तब स्कूल में कार्यरत अध्यापकों की जानकारी उनमें भरी गई, लेकिन वर्तमान में उनमें से कई अध्यापकों का दूसरे स्कूलों में तबादला हो चुका है। ऐसे में पुराने स्कूल की मशीनों से डाटा हटाकर मौजूद स्कूल में उनकी जानकारी को भरना भी किसी चुनौती से कम नहीं है। जिला प्राथमिक शिक्षा संघ के अध्यक्ष राकेश शर्मा ने कहा कि जिस कंपनी की मशीनें हैं, उनके कर्मियों को इसके रखरखाव की जिम्मेदारी दी जानी चाहिए। हम सहयोग के लिए तैयार हैं, लेकिन अगर अध्यापक मशीनें से जुड़ा कार्य भी करेंगे तो बच्चों की पढ़ाई प्रभावित होगी। पहले ही चुनावों के कारण कई अध्यापक कई दिनों तक स्कूल नहीं जा पाए। उपनिदेशक जिला प्रारंभिक शिक्षा विभाग देवेंद्र चंदेल ने कहा कि बायोमेट्रिक मशीनों से जुड़ी समस्या के बारे में उच्चाधिकारियों को सूचित कर दिया गया है। उम्मीद है कि जल्द इस मामले में सकारात्मक कदम उठाए जाएंगे।