सरकार को चेतावनी- अगली महापंचायत से पहले वार्ता के लिए बुलाए, नहीं तो करेंगे आंदोलन
संयुक्त मोर्चा समिति के बैनर तले बिजली बोर्ड कर्मचारियों, पेंशनरों ने किया प्रदर्शन
सरकार की नीतियों का किया विरोध, जिला मुख्यालय में निकाली रोष रैली
अगली जिला पंचायत चंबा में 3 मार्च को तय की
संवाद न्यूज एजेंसी
ऊना। बिजली बोर्ड के करीब 1800 कर्मचारियों, अधिकारियों और पेंशनरों के संयुक्त मोर्चा ने मंगलवार को जिला मुख्यालय में बिजली महापंचायत की। इसमें राज्य संयुक्त संघर्ष समिति के बैनर तले जिलेभर से सैकड़ों कर्मचारियों, उपभोक्ताओं और प्रदेश से पदाधिकारियों ने भाग लिया। राज्य पदाधिकारियों के नेतृत्व में बोर्ड के कर्मचारियों ने आवाज बुलंद करते हुए सरकार और प्रबंधन को मांगें पूरी करने की चेतावनी दी है। सरकार की नीतियों का विरोध करते हुए कर्मचारियों ने जमकर नारेबाजी की। उन्होंने बिजली बोर्ड का निजीकरण बंद करने, ओपीएस की बहाली को लेकर सरकार के खिलाफ नारे लगाए। धूप में भी कर्मचारियों के हौसले बुलंद रहे। हमीरपुर पंचायत में कर्मचारी नेता नितीश भारद्वाज के निलंबन को रद्द कर बहाली करने की मांग भी की गई।
कर्मचारियों का कहना है कि सरकार ओपीएस बहाली और नौजवानों को नौकरियां देने की शर्त पर ही सत्ता में काबिज हुई है। लेकिन, दोनों गारंटियों में सरकार फेल होती दिखाई दे रही है। युवाओं को आउटसोर्स पर नौकरियां देकर उनका शोषण किया जा रहा है। दूसरी ओर बोर्ड में खाली पदों को भरने के बजाय युक्तिकरण के नाम पर पदों को समाप्त करने जा रही है। जिन पदों को सरकार समाप्त कर रही है उससे कर्मचारियों के प्रमोशन के दरवाजे बंद होने जा रहे है। सयुंक्त मोर्चा के बैनर तले कर्मचारियों ने कहा कि सरकार अगर उन्हें वार्ता के लिए नहीं बुलाती है तो प्रदेशभर में बड़े स्तर पर आंदोलन किया जाएगा।
संयुक्त मोर्चा समिति के सह संयोजक हीरा लाल वर्मा ने कहा कि सरकार और प्रबंधन को जिम्मेदारी की भावना के साथ आगे आना चाहिए और बिजली बोर्ड कर्मचारी, अभियंता व पेंशनरों की जेएसी की ओर से उठाए गए मुद्दों पर तुरंत बातचीत करनी चाहिए। उन्होंने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि आक्रोश को देखते हुए प्रबंधन इन मुद्दों पर वार्ता व समाधान नहीं करता है तो बड़ा आंदोलन करने को मजबूर होंगे। इसके लिए प्रबंधन को पहले ही नोटिस दिया जा चुका है।
महापंचायत के बाद शहर में रैली निकाली गई। गलुआ चौक से बाजार, रोटरी चौक होते हुए मिनी सचिवालय तक आक्रोश रैली निकाली गई। कर्मचारियों ने सरकार के खिलाफ जमकर नारे लगाए। वहीं, जिलाधीश के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा गया। मांगों का समय रहते निवारण न करने पर अगली जिला पंचायत चंबा में 3 मार्च को तय की गई।
इस मौके पर संयुक्त मोर्चा समिति के नेता ईं. एमएल वशिष्ठ, चंद्र सिंह मंडयाल, ईं. केडी शर्मा, कुलदीप खरवाड़ा, कामेश्वर दत्त शर्मा, अजय पराशर, ईं. दीपक चौहान, अश्वनी शर्मा, शांतिस्वरूप शर्मा, जगमेल ठाकुर, पवन मोहल, मुनीश शर्मा, पंकज शर्मा, शाम लाल मौजूद रहे।
संयुक्त मोर्चा समिति की मुख्य मांंगें-
- बिजली बोर्ड में एकतरफा युक्तिकरण और पदों में कटौती पर रोक लगाई जाए। हाल ही में खत्म किए 51 पदों की बहाली और बिजली बोर्ड में कर्मचारियों की भारी कमी को देखते हुए खाली पदों पर तुरंत भर्ती प्रक्रिया शुरू की जाए।
- मई, 2003 के बाद भर्ती बिजली कर्मचारियों के लिए पुरानी पेंशन प्रणाली को लागू किया जाए।
- पिछले दो वर्षों से लंबित पेंशनरों के पेंशन बकाया राशि, लीव इनकैशमेंट और ग्रेच्युटी की अदायगी शीघ्र की जाए।
- बिजली बोर्ड में कार्यरत आउटसोर्स कर्मियों की स्थायी नीति बनाई जाए। पिछले दिनों छंटनी किए गए 81 ड्राइवरों (आउटसोर्स) को फिर से काम पर रखा जाए।
- सरकार और हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड कर्मचारी एवं अभियंता संयुक्त मोर्चा के बीच हस्ताक्षरित द्विपक्षीय समझौते के प्रावधानों का पालन किया जाएगा और उनके परामर्श के बिना किसी भी परिसंपत्ति का हस्तांतरण नहीं किया जाएगा।
- हिमाचल प्रदेश राज्य विद्युत बोर्ड के सब स्टेशन एवं पावर हाउस के संचालन एवं रख-रखाव की आउटसोर्सिंग बंद की जाए।