जिले की झोली खाली पर उद्योगों को राहत
विद्युत शुल्क पर छूट से लघु उद्योगों को राहत, वोल्टेज सुधार को 50 करोड़ से उद्योगों को मिलेगी गति
एसजीएसटी पर नीति के एलान से उत्साहित हुए उद्यमी
शशिभूषण पुरोहित
ऊना।
जयराम सरकार के पहले बजट में ऊना की झोली खाली रह गई है। उद्योगों से जुड़े मामलों में छूट से लघु और मझोले उद्योगों की तस्वीर संवरने की उम्मीद है। इससे कई तरह की मुश्किलों से जूझ रहे ऊना जिले के लघु और मध्यम उद्योगों की हालत सुधरने की आस जगी है। कई उद्योग तो बंद होने के कगार पर हैं। जयराम सरकार ने अपने बजट में जिला के लिए किसी तरह के नए औद्योगिक कॉरिडोर की घोषणा तो नहीं की लेकिन विद्युत शुल्क में छूट से इन उद्योगों को राहत मिली है। वहीं, एसजीएसटी पर की समुचित अदायगी को लेकर ठोस नीति की घोषणा से उद्योगपति और कारोबारी उत्साहित हैं।
भाजपा सरकार का आम बजट कारोबारियों और उद्योगपतियों के लिए राहत भरा माना जा रहा है। ऊना के औद्योगिक क्षेत्रों में खासकर टाहलीवाल, मैहतपुर और गगरेट में वोल्टेज की समस्या से ब्रेकडाउन पर उद्योगों को लाखों का नुकसान झेलना पड़ता है। प्रदेश सरकार ने बजट में वोल्टेज की समस्या में सुधार के लिए विद्युत बोर्ड लिमिटेड को 50 करोड़ की इक्विटी का प्रावधान रखा है। बताया जा रहा है कि बजट का अधिकांश हिस्सा औद्योगिक क्षेत्रों में विद्युत लाइनों के रखरखाव पर खर्च किया जाएगा। इससे उद्योगों को राहत मिलने की उम्मीद है। सरकार ने सभी नए छोटे और मध्यम उद्योगों को पांच साल तक विद्युत शुल्क पर पूरी तरह से छूट देने का एलान किया है। इससे प्रदेश में निवेश को बढ़ावा मिलेगा जबकि सरकार के बजट में पुराने स्थापित लघु व मध्यम उद्योगों के लिए विद्युत शुल्क क्रमश: चार प्रतिशत से घटाकर दो फीसदी और 10 प्रतिशत से घटाकर सात फीसदी करने का एलान किया है। जिला में लघु एवं मध्यम उद्योग चला रहे उद्योगपति पीसी शर्मा, बीएस चंदेल, सीआर कौशल, वीरेंद्र कश्यप, दीप शर्मा, बलतेजइंद्र सिंह, अनिल सपाटिया, अशोक शर्मा, रामपाल और सीएस कपूर आदि का कहना है कि विद्युत शुल्क में छूट राहत प्रदान करेगी। हालांकि उन्होंने कहा कि मैहतपुर में एक मदर यूनिट की स्थापना आवश्यक है। सरकार को इस दिशा में कुछ करना चाहिए।
ऊना के आलू को भूली सरकार
जयराम सरकार ने आलू चिप्स बनाने के लिए कांगड़ा और कुल्लू का चयन किया है। आलू के सर्वाधिक उत्पादक जिला ऊना को सरकार भूल गई। आलू ऊना की मुख्य फसल है। यहां से आलू की शेष हिमाचल समेत पड़ोसी राज्य पंजाब तक आपूर्ति की जाती है। विभागीय अनुमान के मुताबिक जिला में हर साल लगभग 700 हेक्टेयर भूमि पर दो चरणों में आलू उगाया जाता है। बजट में जिला के आलू के लिए कोई प्रावधान न होने से आलू उत्पादक निराश हैं।