थानाकलां (ऊना)। केंद्र सरकार की बहुआयामी मनरेगा सकीम उपमंडल बंगाणा में दम तोड़ रही है। मनरेगा के मजदूरों को तीन माह से दिहाड़ी नहीं मिल पाई है। जबकि दो सप्ताह के अंदर दिहाड़ी मजदूर के खाते में नहीं डाली जाती है तो संबंधित विभाग पर जुर्माने का प्रावधान है। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी अधिनियम (मनरेगा) के तहत काम कर रहे हजारों मजदूरों को तीन माह से पैसों का भुगतान नहीं किया गया है। इसका कारण केंद्र से फंड न मिलना बताया जा रहा है। आलम यह है कि बंगाणा उपमंडल में मनरेगा के तहत 31 लाख से अधिक की देनदारी हो गई है। इसके चलते मनरेगा से लोगों का मोह भी भंग होने लगा है। ब्लॉक बंगाणा के तहत मजदूरी न मिलने से मजदूरों ने मनरेगा कार्य छोड़ना शुरू कर दिया है। जानकारी के अनुसार मजदूरों को समय पर दिहाड़ी न मिलने के कारण उन्हें अपने घर परिवार का लालन पोषण करना मुश्किल हो गया है। दो माह कार्य करने के बाद भी उन्हें कुछ नहीं मिला है। इसके चलते कुछ मजदूरों ने मनरेगा के तहत कार्य करना छोड़ दिया है, वहीं कुछ छोड़ने का मन बनाने लगे हैं। मजदूरों के मुताबिक करीब दो माह से उन्हें अपने बच्चों की स्कूल फीस, राशन, बीमारी के दौरान दवाइयों का खर्चा उठाने तक के लिए पैसे नहीं है। ब्लॉक बंगाणा के तहत मरनेगा में 40 पंचायतों के 6,118 परिवार काम करते हैं। उधर, पंचायत डोहगी के उपप्रधान सुदर्शन शर्मा ने बताया कि मनरेगा में काम करने वाले मजदूरों को पिछले काफी समय से दिहाड़ी नहीं मिल रही है। इस कारण लोग मनरेगा से दूरी बनाने लगे हैं। पैसे न मिलने के कारण कौन मनरेगा के तहत काम करेगा।
केंद्र से धनराशि आते ही मिलेगी दिहाड़ी
विकास खंड अधिकारी बंगाणा सोनू गोयल ने बताया कि ब्लॉक बंगाणा के तहत मनरेगा में काम करने वाले परिवारों में दिन प्रतिदिन इजाफा हो रहा है। कुछ समय से मनरेगा के तहत केंद्र से फंड नहीं मिल पाया है। जैसे ही केंद्र से फंड मिलेगा मजदूरी का भुगतान कर दिया जाएगा। उन्होंने कहा कि इसके लिए विभाग प्रयासरत है। मजदूरों की परेशानियों का जल्द समाधान कर दिया जाएगा।