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हिमाचल प्रदेश: अति निर्धन परिवारों के चयन से पहले पात्रता, फिर अपात्रता की होगी जांच, मानदंड स्पष्ट

Thu, 27 Aug 2026 05:00 AM IST
Krishan Singh अमर उजाला ब्यूरो, शिमला।

सार

योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए सरकार दो चरणों में लाभार्थियों का चयन करेगी। पहले समावेशन मानदंडों के आधार पर पात्र परिवारों का एक बड़ा पूल तैयार किया जाएगा। 
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मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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मुख्यमंत्री अपना परिवार सुखी परिवार योजना के तहत अति निर्धन परिवारों की पहचान को लेकर हिमाचल सरकार ने चयन प्रक्रिया और मानदंड स्पष्ट कर दिए हैं। योजना का लाभ वास्तविक जरूरतमंदों तक पहुंचाने के लिए सरकार दो चरणों में लाभार्थियों का चयन करेगी। पहले समावेशन मानदंडों के आधार पर पात्र परिवारों का एक बड़ा पूल तैयार किया जाएगा। इसके बाद बहिष्करण की चार शर्तों के आधार पर अंतिम छंटनी होगी। चयन के लिए दोहरी कसौटी तय की गई है। इसके तहत पहले पात्रता फिर अपात्रता की जांच होगी। विधानसभा में ग्रामीण विकास मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने चयन के तय मानदंडों से सभी विधायकों को अवगत कराया।

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75 हजार रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवार ले सकेंगे लाभ
75 हजार रुपये से अधिक वार्षिक आय वाले परिवार योजना का लाभ नहीं ले सकेंगे। एक हेक्टेयर से अधिक भूमि, आयकरदाता सदस्य या सरकारी, अर्धसरकारी अथवा निजी नौकरी करने वाला सदस्य होने पर परिवार को अंतिम सूची से बाहर कर दिया जाएगा। समावेशन प्रक्रिया में सामाजिक और आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों को प्राथमिकता दी गई है। 27 वर्ष से कम आयु के अनाथ बच्चों वाले परिवार, ऐसे परिवार जिनमें केवल 59 वर्ष से अधिक आयु के सदस्य हैं और 27 से 59 वर्ष का कोई वयस्क नहीं है, पात्र पूल में शामिल किए जाएंगे। 

ये परिवार भी होंगे पात्र
इसके अलावा महिला मुखिया वाले परिवार, जिनमें 27 से 59 वर्ष का कोई वयस्क सदस्य नहीं है, भी पात्र होंगे। इनमें विधवा, अविवाहित, तलाकशुदा और परित्यक्त महिलाएं शामिल हैं। 40 प्रतिशत या इससे अधिक दिव्यांगता वाले मुखिया के परिवारों को भी पूल में शामिल किया जाएगा। वहीं जिन परिवारों के सभी वयस्क सदस्यों ने पिछले वित्तीय वर्ष में मनरेगा में कम से कम एक दिन काम किया है, उन्हें भी प्रारंभिक पात्रता मिलेगी। कैंसर, अल्जाइमर, पार्किंसंस, मस्कुलर डिस्ट्रॉफी, हीमोफीलिया, थैलेसीमिया जैसी गंभीर बीमारी से स्थायी रूप से अक्षम कमाने वाले सदस्य वाले परिवार और दुर्घटना में रीढ़ की हड्डी में चोट लगने से स्थायी रूप से बिस्तर पर पड़े कमाने वाले सदस्य वाले परिवार भी इस दायरे में आएंगे।

चार कसौटियां पूरी न हुईं तो बाहर
प्रारंभिक पात्रता के बाद परिवारों की अंतिम जांच होगी। अपात्र पाए जाने वाले परिवार को योजना से बाहर कर दिया जाएगा। सरकार ने उदाहरण के माध्यम से प्रक्रिया भी स्पष्ट की है। यदि परिवार के सभी वयस्क सदस्यों ने मनरेगा में कम से कम एक दिन काम किया है, तो परिवार पहले पात्र पूल में आएगा। लेकिन यदि जांच में उसकी वार्षिक आय 75 हजार रुपये से अधिक निकलती है, तो उसे अंतिम सूची से बाहर कर दिया जाएगा। वहीं आय 75 हजार रुपये या इससे कम, जमीन एक हेक्टेयर या कम और आयकरदाता या नौकरी करने वाला कोई सदस्य नहीं होने पर परिवार अंतिम रूप से योजना का पात्र माना जाएगा।

अति निर्धन परिवारों के चयन में लापरवाही बरती तो बीडीओ, एसडीएम पर होगी कार्रवाई: अनिरुद्ध सिंह
 पंचायती राज और ग्रामीण विकास मंत्री मंत्री अनिरुद्ध सिंह ने कहा कि प्रदेश में अति निर्धन परिवारों को सरकारी योजनाओं का लाभ देने के लिए पात्र परिवारों के चयन में लापरवाही बरती गई तो खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) और उपमंडलाधिकारी (एसडीएम) पर कार्रवाई होगी। बुधवार को शून्यकाल के दौरान भाजपा विधायक जीतराम कटवाल की ओर से उठाए गए मामले पर मंत्री ने बताया कि पात्र परिवारों के चयन के लिए समितियां गठित की गई हैं। इन समितियों के माध्यम से पात्रता की जांच और सूची तैयार करने की प्रक्रिया की जा रही है। सरकार ने अधिकारियों को चयन प्रक्रिया में पूरी पारदर्शिता बरतने के निर्देश दिए हैं। मंत्री ने सख्त चेतावनी देते हुए कहा कि यदि किसी अपात्र व्यक्ति को सूची में शामिल किया गया या किसी पात्र परिवार को जानबूझकर बाहर रखा गया तो जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
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जीतराम कटवाल ने वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को सूची में शामिल करने की मांग उठाई
लापरवाही पाए जाने पर बीडीओ और एसडीएम भी कार्रवाई के दायरे में आ सकते हैं। अपना परिवार, सुखी परिवार योजना का लाभ निर्धारित पात्रता पूरी करने वाले अति निर्धन परिवारों को ही दिया जाएगा। इसके लिए परिवार की वार्षिक आय 75 हजार रुपये से कम होना जरूरी है। परिवार के कम से कम एक सदस्य का मनरेगा में न्यूनतम एक दिन काम करना भी पात्रता की शर्तों में शामिल है। मंत्री ने स्पष्ट किया कि सरकारी नौकरी वाले परिवार इस योजना के पात्र नहीं होंगे। सरकार ने सभी जिलाधीशों को निर्देश जारी कर दिए हैं कि वे पात्र परिवारों की सूची की समीक्षा कर 30 अगस्त तक पूरी सूची सरकार को उपलब्ध करवाएं। उधर, विधायक जीतराम कटवाल ने वास्तविक जरूरतमंद परिवारों को सूची में शामिल करने और सर्वे प्रक्रिया में पारदर्शिता सुनिश्चित करने की मांग उठाई। उन्होंने आरोप लगाया कि कई पात्र परिवार आय प्रमाणपत्र सहित अन्य औपचारिकताओं के कारण योजना के लाभ से वंचित रह रहे हैं, जबकि प्रभावशाली लोग अपना नाम सूची में शामिल करवाने में सफल हो रहे हैं। उनके क्षेत्र में पिछले सर्वे में करीब 150 परिवार पात्र पाए गए थे, जबकि नए सर्वे में यह संख्या घटकर महज 30 से 40 रह गई है। उन्होंने सरकार से इस अंतर की जांच करवाने और छूटे हुए पात्र परिवारों को सूची में शामिल करने की मांग की।
 
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