लेक्चर में न एक मिनट लेट, न ही कभी बीच में छोड़ी कक्षा
35 साल की नौकरी में सिर्फ 25 आकस्मिक अवकाश लिए और कभी भी एक भी अर्जित अवकाश नहीं लिया हैं। डाॅ. नरेश शर्मा वर्तमान में धर्मशाला कॉलेज में अंग्रेजी विभाग में एसोसिएट प्रोफेसर है। 35 साल में कम छुट्टियां करने और लेक्चर मिस न करने के लिए उनका नाम गिनीज और लिम्का बुक में दर्ज करवाने के लिए भी गया हुआ था। नरेश शर्मा कभी अपने लेक्चर के लिए एक भी मिनट लेट नहीं पहुंचे हैं। वहीं लेक्चर के बीच अगर कभी प्रिंसिपल ने भी उन्हें बुलाया है, तो भी वे लेक्चर बीच में छोड़ कर उनसे मिलने नहीं गए हैं। उन्होंने बताया कि उन्हें 11 संस्थानों ने बेस्ट टीचर अवाॅर्ड से भी नवाजा है। वे पढ़ाने के लिए इतने खुश रहते हैं कि उन्होंने पिछले 33 साल में एक भी प्रमोशन नहीं ली। प्रमोशन लेकर उनका तो भला हो जाएगा, लेकिन वे बच्चों को पढ़ाने से वंचित हो जाएंगे।
स्मार्ट यूनिफॉर्म से बढ़ाया बच्चों का उत्साह
भटेड़ स्कूल में कार्यरत शिक्षक परमजीत सिंह ने अपने स्कूल में स्मार्ट यूनिफॉर्म शुरू कर बच्चों में आत्मविश्वास और स्वच्छता बढ़ाई। छोटे बच्चों के लिए प्री-प्राइमरी कक्षाएं संचालित करवाई। कोरोना में उन्होंने डोर-टू-डोर और ऑनलाइन शिक्षण के माध्यम से बच्चों की पढ़ाई सुनिश्चित की। हिंदी साहित्य में सात व्यक्तिगत और 15 सामूहिक पुस्तकें प्रकाशित की। उनके प्रयासों को राष्ट्रीय और राज्य स्तर पर कई पुरस्कारों से सम्मानित किया गया है, जिनमें नवोदय क्रांति राष्ट्र रत्न अवार्ड, भारती एअरटेल फाउंडेशन रॉकस्टार अवार्ड, आपदा प्रबंधन पुरस्कार और बेस्ट एसएमसी अवार्ड शामिल हैं। परमजीत सिंह ने कहा कि शिक्षक का केवल बुद्धिमान होना ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसे कर्मशील और नवाचारी भी होना चाहिए।
डॉ. कीर्ति सिंघा का विज्ञान क्षेत्र में योगदान
संजौली कॉलेज की डॉ. कीर्ति सिंघा मूलत: गांव शरमाली तहसील रोहड़ू शिमला की रहने वाली हैं और 16 वर्षों से शिक्षण कार्य कर रही हैं। उनका विज्ञान के क्षेत्र में अहम योगदान रहा है, उनके चार पेंटेंट दर्ज हैं। डीबीटी स्टार कॉलेज की कोऑर्डिनेटर रहते हुए संजौली कॉलेज को एक करोड़ का बजट दिलवाया। विश्वविद्यालय के नैनाे साइंटिस्ट और एचपीयू के कुलपति प्रो. महावीर सिंह के मार्गदर्शन में नैनो मेटिरियल पर रिसर्च कर रही हैं। डा. कीर्ति ने अपने विद्यार्थियों को फिजिक्स पढ़ाने के अलावा उन्हें प्रतियोगी परीक्षाओं के लिए तैयार करने, उन्हें अपनी प्रतिभा को दर्शाने के लिए मंच प्रदान करने के साथ उनके व्यक्तित्व के संपूर्ण विकास के लिए कॉलेज में निरंतर प्रयास किए हैं।
खेलकूद को बढ़ावा दे रहे राजकुमार
खेल जगत के क्षेत्र में विदेशों में अपना डंका बजवाने वाले राजकुमार पाल ने बताया कि पढ़ाई के दौरान ही उनके खेलों में बहुत रुचि थी। कई बार स्टेट के लिए भी बास्केटबाल खेला और संकल्प लिया कि वह भी शारीरिक शिक्षा के तौर पर अपना कॅरिअर बनाएंगे। उन्होंने कारगिल में भी अपनी सेवा दी। कारगिल जाने से पहले उन्हें कई लोगों ने उन्हें जाने के लिए मना भी कि वह नहीं माने। डीसी ने उन्हें बेहतरीन सेवाओं के लिए सम्मानित किया। राज कुमार स्पेशल ओलंपिक विश्व खेलें 2019 जो कि अबू धाबी (दुबई) में हुई। उसमें भी भारतीय लड़कों की बॉस्केटबाल टीम के साथ प्रशिक्षक के रूप में देश का प्रतिनिधित्व कर चुके हैं। इस टीम ने भी रजत पदक जीत कर देश को गौरवान्वित किया था। कई खिलाड़ी स्पोर्ट्स कोटे से नियुक्त होकर भारत व हिमाचल सरकार के विभिन्न विभागों में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।
मेडिकल की पढ़ाई के लिए विद्यार्थियों को किया प्रेरित
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला सेराथाना में कार्यरत जीव विज्ञान की प्रवक्ता अनीता चौधरी के अब तक कार्यकाल से हर स्कूल से विद्यार्थियों को नीट पास करवाया। चौधरी ने बच्चाें को मेडिकल की पढ़ाई के लिए प्रेरित किया। मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट के लिए भी मार्गदर्शन किया। इसी का नतीजा है कि आज अनीता के पढ़ाए कई छात्र जहां चिकित्सक हैं, तो कई विदेशों में ऊंचे पदों पर अपनी सेवाएं दे रहे हैं। उन्होंने विशेष रूप से ग्रामीण पृष्ठ भूमि और सरकारी स्कूल से आए हुए विद्यार्थियों को चिकित्सा के क्षेत्र में आगे बढ़ने के लिए तैयार किया है। कई मौकों पर आर्थिक तंगी से जूझ रहे विद्यार्थियों की मदद भी की। इसके अलावा उनके विद्यार्थियों के चिल्ड्रन साइंस कांग्रेस में भी राज्य स्तर तक अपनी प्रतिभा दिखा कर आए हैं।