आईजीएमसी में कहा गया कि सुबाथू से देह लाना मुश्किल है और उनके पास कोई इंतजाम नहीं है। बुजुर्ग निराश होकर लौट आए, जिससे देहदान के अभियानों पर सवाल खड़े हो गए हैं। सुरेंद्र सिंह 3 जुलाई को आईजीएमसी शिमला गए थे और पर्ची बनवाते समय देहदान की इच्छा बताई थी।
उनका दावा है कि उन्हें एक विभाग से दूसरे और पहली से 10वीं मंजिल तक भेजा गया। पूरा दिन खराब होने के बाद उन्हें अगले दिन आने को कहा गया। 4 जुलाई को भी उन्हें दिनभर विभागों में भेजा गया। दूसरे दिन पूरी जानकारी लेने के बाद उन्हें सुबाथू दूर होने का हवाला देकर मना कर दिया गया। बुजुर्ग का कहना है कि सुबाथू में दो हेलिपैड हैं और कई जगह से पहुंचा जा सकता है।
देहदान की वजह
सुरेंद्र सिंह की दो बेटियां हैं, जिनकी शादी हो चुकी है। वह अपनी पत्नी के साथ रहते हैं। उन्होंने अपनी पत्नी से बात की थी और उन्होंने भी देहदान के लिए सहमति दी थी। बुजुर्ग मरने के बाद बेटियों और दामाद पर कोई बोझ नहीं डालना चाहते हैं। यह कदम चिकित्सा विज्ञान की प्रगति में अमूल्य योगदान देता है।
यह मामला उनके संज्ञान में नहीं है। यदि किसी ने बुजुर्ग को इन्कार किया है तो इसकी जांच की जाएगी। संबंधित स्टाफ या चिकित्सक से जवाब मांगा जाएगा। आईजीएमसी में कई लोग देहदान करते हैं और किसी को इन्कार नहीं किया जाता है। - अंजु प्रताप, विभागाध्यक्ष एनाटॉमी, आईजीएमसी शिमला