प्रदेश में आईएएस अधिकारियों के कुल 153 पद स्वीकृत हैं। इनमें से बड़ी संख्या में अधिकारियों का केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर होना यह दर्शाता है कि केंद्र में हिमाचल कैडर के अधिकारियों की मांग बढ़ी है। वहीं, राज्य प्रशासन में वरिष्ठ अधिकारियों की उपलब्धता भी एक महत्वपूर्ण मुद्दा बनता जा रहा है। वर्तमान में अनुराधा ठाकुर, भरत हरबंस लाल खेड़ा, मनीष गर्ग, डॉ. रजनीश, सुभाशीष पंडा, अमनदीप गर्ग, पुष्पेंद्र राजपूत, मीरा मोहंती, प्रियतु मंडल, कदम संदीप बसंत, मानसी सहाय ठाकुर, रोहन चंद ठाकुर, ललित जैन, ऋग्वेद मिलिंद ठाकुर, डॉ. रिचा वर्मा, पंकज राय, हरिकेश मीणा, देवश्वेता बनिक, कृतिका कुलहरी, आशुतोष गर्ग, अरिंदम चौधरी और निधि पटेल केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर कार्यरत हैं।
आईएएस अधिकारी निपुण जिंदल और राकेश कुमार प्रजापति को केंद्रीय प्रतिनियुक्ति पर लेने के लिए केंद्र सरकार ने विभाग आवंटित कर दिए हैं। औपचारिक आदेश जारी होने के बाद दोनों अधिकारी केंद्र सरकार में नई जिम्मेदारियां संभालेंगे। वहीं डॉ. यूनुस और राघव शर्मा ने भी केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए आवेदन किया है। इनके मामलों पर केंद्र स्तर पर विचार चल रहा है। सचिव स्तर के अधिकारियों में सी पालरासू, अभिषेक जैन और ए शाइनामोल को प्रदेश सरकार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के लिए अनापत्ति प्रदान कर चुकी है। हालांकि इनके नियुक्ति आदेश अभी केंद्र सरकार की ओर से जारी नहीं हुए हैं। आदेश जारी होने के बाद हिमाचल से केंद्र में जाने वाले वरिष्ठ अधिकारियों की संख्या और बढ़ सकती है।
व्यापक प्रशासनिक अनुभव के लिए बढ़ रहा आकर्षण
प्रशासनिक जानकारों के अनुसार केंद्रीय प्रतिनियुक्ति अधिकारियों को राष्ट्रीय स्तर पर नीति निर्माण, बड़े बजट वाले कार्यक्रमों और विभिन्न मंत्रालयों में काम करने का अवसर देती है। इससे अधिकारियों को व्यापक प्रशासनिक अनुभव मिलता है और कॅरिअर में भी महत्वपूर्ण अवसर प्राप्त होते हैं। यही कारण है कि युवा और मध्यम वरिष्ठता वाले अधिकारी बड़ी संख्या में केंद्र में सेवाएं देने के इच्छुक दिखाई दे रहे हैं।
आईएएस कैडर कम करने के पक्षधर हैं सीएम सुक्खू
आर्थिक दिक्कतों से जूझ रहे हिमाचल में मुूख्यमंत्री सुक्खू आईएएस कैडर को कम करने के पक्षधर हैं। मुख्यमंत्री सार्वजनिक तौर पर कई बार कह चुके हैं कि आईएएस, आईपीएस और आईएफएस अधिकारियों की संख्या को प्रदेश में कम किया जाएगा। जानकारों का कहना है कि यही एक बड़ा कारण है कि प्रदेश सरकार की ओर से केंद्रीय प्रतिनियुक्ति के इच्छुक अधिकारियों की एनओसी को रोका नहीं जा रहा है।