इस मामले में तत्कालीन पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) सोमेश गोयल, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक (एएसपी) भजन देव नेगी, दो पुलिस कांस्टेबल, जिसमें रात्रि संतरी दिनेश कुमार और रात्रि मुंशी मुकेश शर्मा शामिल हैं, जो 18 और 19 जुलाई, 2017 की मध्यरात्रि को कोटखाई पुलिस स्टेशन में संदिग्ध सूरज की हिरासत में हुई, यातना के गवाह बने। हिमाचल के तत्कालीन डीजीपी सोमेश गोयल ने कोर्ट को बताया कि सूरज सिंह की मौत के बाद आईजी जैदी ने गलत सूचना दी कि सूरज की मौत दूसरे संदिग्ध के साथ हाथापाई के कारण हुई है। आईजी जैदी ने कांस्टेबल दिनेश कुमार की ओर से घटना के बारे में उन्हें बताई गई बातों को छिपाया। आईजी ने उन्हें प्रारंभिक जांच रिपोर्ट भी नहीं सौंपी, बल्कि एक पत्र के माध्यम से बताया कि पुलिस स्टेशन में भीड़ की आगजनी के कारण उनकी जांच बाधित हुई।
आरोपियों ने कोर्ट में दिए यह बयान
आईपीएस जैदी : बयान दिए कि सीबीआई ने रिकॉर्ड में हेराफेरी की है और उसके खिलाफ झूठे साक्ष्य तैयार किए। स्वयं को निर्दोष बताते हुए कहा है कि वह सीबीआई की ओर से दुर्भावनापूर्ण जांच का शिकार है।
डीएसपी मनोज जोशी : सूरज सिंह की मृत्यु में उसकी कोई भूमिका नहीं है। वह मामले में किसी भी आरोपी को प्रताड़ित करने में शामिल नहीं था। न ही किसी गवाह ने उसके खिलाफ कोई गवाही नहीं दी।
एसएचओ राजिंद्र सिंह : सूरज सिंह के साथ उनकी कोई दुश्मनी नहीं थी और गवाहों ने उनके द्वारा किसी भी तरह की मारपीट या यातना के बारे में गवाही नहीं दी है।
एचसी दीपचंद शर्मा : उसने गुड़िया मामले में न तो किसी को प्रताड़ित किया है और न ही किसी को हिरासत में लिया है। उस रात को वह न तो जांच अधिकारी के पद पर था और न ही सूरज सिंह से पूछताछ में शामिल था।
मोहन लाल: वह एसआईटी का सदस्य नहीं था। सीबीआई ने उसे गवाह बनने के लिए कहा था। उसके मना करने पर झूठा आरोपी बनाया गया।
सूरत सिंह: मामले में न्यायिक जांच भी की गई थी और उसे जांच में कभी भी नहीं बुलाया गया। उसे इस मामले में झूठा फंसाया गया है।
रफी मोहम्मद और रंजी सतेता : दोनों ने भी खुद को निर्दोष बताया है।
करीब आधे घंटे तक सूरज सिंह की चीखने की आवाजें सुनीं। जब उसने ऊपर जाकर देखा तो सूरज को उल्टा नंगा लटकाकर बुरी तरह से पीटा जा रहा था। रात में करीब 11.45 बजे एसएचओ राजिंद्र व अन्य जवान सूरज को बेहोशी की हालत में ग्राउंड फ्लोर पर लाए और अस्पताल ले गए। सुबह करीब 4.30 बजे उसे फोन करके थाने में बुलाया गया। एसएचओ ने उसे कहा कि घटना उसके ड्यूटी समय में हुई है, इसलिए उसके बयान पर एफआईआर दर्ज की जाएगी।
एसएचओ ने कहा कि एफआईआर में दिखाया जाएगा कि सूरज को पुलिस लॉकअप में एक अन्य आरोपी राजू ने मारा है। अगली सुबह आईजी जैदी थाने में आए और उससे घटना के बारे में पूछा। उसने घटना सुनाई, जो आईजी के मोबाइल फोन में रिकॉर्ड हो गई। इसके साथ ही उससे झूठे बयानों पर भी हस्ताक्षर करने के लिए कहा, जो उसने नहीं किए। डीएसपी ने उससे कहा था कि दिनेश इसमें कुछ भी नहीं है, क्योंकि यह एक धर्म युद्ध है और इसमें कोई भी मर सकता है। सूरज सिंह एक आरोपी था और उसे फांसी होनी थी, इसलिए अगर हमने उसे मार दिया होता तो चिंता की कोई बात नहीं है।