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कीरतपुर-मंडी फोरलेन: अब 80 किमी प्रति घंटा होगी गति सीमा, मुकेश अग्निहोत्री ने गडकरी से उठाया मुद्दा

Thu, 03 Sep 2026 09:22 PM IST
Krishan Singh संवाद न्यूज एजेंसी, बिलासपुर।

सार

 उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात के दौरान कीरतपुर-बिलासपुर-मंडी फोरलेन पर अधिकतम गति सीमा का मुद्दा प्रमुखता से उठाया। बैठक में हिमाचल प्रदेश से जुड़े सड़क, परिवहन और पर्यटन क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई।
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केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी से मिले उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री। - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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कीरतपुर-बिलासपुर-मंडी फोरलेन पर वाहन चालकों को जल्द राहत मिलने वाली है। इस मार्ग पर वाहनों की अधिकतम गति सीमा 60 किलोमीटर प्रति घंटा से बढ़ाकर 80 किलोमीटर प्रति घंटा करने पर सहमति बनी है। उप मुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने नई दिल्ली में केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी से मुलाकात के दौरान यह मुद्दा प्रमुखता से उठाया। बैठक में हिमाचल प्रदेश से जुड़े सड़क, परिवहन और पर्यटन क्षेत्र के कई महत्वपूर्ण विषयों पर भी चर्चा हुई। स्पीड लिमिट बढ़ाने पर सहमति बनने से फोरलेन पर सफर करने वाले वाहन चालकों को समय की बचत होगी और यात्रा अधिक सुविधाजनक होने की उम्मीद है। फोरलेन शुरू होने के बाद से ही इस पर अधिकतम गति सीमा 60 किमी प्रति घंटा निर्धारित है। इसे बढ़ाने की मांग लंबे समय से उठती रही है। वाहन चालकों का तर्क था कि फोरलेन बनने के बावजूद कम गति सीमा का कोई औचित्य नहीं है।

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जनभागीदारी से जल संरक्षण को जन आंदोलन बनाए हिमाचल : अग्निहोत्री
जल संकट से निपटने और भविष्य की पेयजल जरूरतों को सुरक्षित करने के लिए जल संरक्षण को केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित रखने के बजाय जनभागीदारी से व्यापक जन आंदोलन बनाने की जरूरत है। उपमुख्यमंत्री मुकेश अग्निहोत्री ने नई दिल्ली में जल शक्ति मंत्रालय की ओर से आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय जल सुरक्षा शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में यह बात कही। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुए सम्मेलन में देश की जल सुरक्षा और जल संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन से जुड़े विभिन्न मुद्दों पर चर्चा हुई। उपमुख्यमंत्री ने कहा कि हिमाचल जैसे पर्वतीय राज्य में प्राकृतिक जल स्रोतों का संरक्षण सीधे तौर पर लोगों की पेयजल जरूरतों से जुड़ा है।
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बदलते मौसम और जलवायु परिवर्तन के कारण जल स्रोतों पर बढ़ते दबाव को देखते हुए पेयजल योजनाओं को मजबूत करने के साथ जल संसाधनों का वैज्ञानिक और सतत प्रबंधन जरूरी है। उन्होंने कहा कि भविष्य की जल जरूरतों को ध्यान में रखते हुए अभी से दीर्घकालिक योजनाएं तैयार करनी होंगी। अग्निहोत्री ने जल संरक्षण में आधुनिक तकनीक के प्रभावी इस्तेमाल पर भी जोर दिया। जल संसाधनों की निगरानी, उपलब्धता का बेहतर आकलन और योजनाओं के वैज्ञानिक प्रबंधन में तकनीक की भूमिका महत्वपूर्ण हो सकती है। उन्होंने कहा कि केंद्र और राज्यों के बीच बेहतर समन्वय तथा विभिन्न राज्यों में अपनाए जा रहे सफल प्रयोगों को साझा करने से जल क्षेत्र की चुनौतियों का प्रभावी समाधान निकाला जा सकता है। उन्होंने कहा कि हिमाचल प्रदेश सरकार जल संरक्षण और जल संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के लिए प्रतिबद्ध है। प्राकृतिक जल स्रोतों को बचाने, पेयजल व्यवस्था को सुदृढ़ करने और बदलती जलवायु परिस्थितियों के अनुरूप जल प्रबंधन को मजबूत करने की दिशा में हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं। सम्मेलन में जल सुरक्षा, जल संरक्षण, पेयजल व्यवस्था और जल संसाधनों के प्रभावी उपयोग जैसे विषय प्रमुखता से चर्चा में रहे।
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