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आईआईटी मंडी का शोध: हिमालयी झीलों की गहराई और जल क्षमता का आकलन करेगा सोनार

Sat, 29 Aug 2026 06:00 AM IST
Krishan Singh राकेश राणा, संवाद न्यूज एजेंसी, मंडी।

सार

भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने मानव रहित सतही नौका (यूएसवी) पर सोनार लगाकर हिमालयी झीलों का सर्वेक्षण किया है। शोध में यह तरीका कम लागत और कम जोखिम के साथ झीलों की गहराई, आयतन (वाल्यूम) और भौतिक संरचना का विस्तृत आकलन करने में प्रभावी पाया गया है। 
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आईआईटी मंडी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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हिमालय की ऊंचाई पर स्थित झीलों की गहराई और जल क्षमता का आकलन अब कम लागत वाली तकनीक से किया जा सकेगा। भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मंडी के शोधकर्ताओं ने मानव रहित सतही नौका (यूएसवी) पर सोनार लगाकर हिमालयी झीलों का सर्वेक्षण किया है। शोध में यह तरीका कम लागत और कम जोखिम के साथ झीलों की गहराई, आयतन (वाल्यूम) और भौतिक संरचना का विस्तृत आकलन करने में प्रभावी पाया गया है। यह शोध ईजीयू जनरल असेंबली 2026 में प्रकाशित हुआ है।

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आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग के शोधकर्ताओं ने उत्तर-पश्चिमी हिमालय की तीन झीलों को अध्ययन के लिए चुना। इनमें लाहौल-स्पीति में बारालाचा ला के पास 3,770 मीटर की ऊंचाई पर स्थित दीपक ताल, 4,777 मीटर की ऊंचाई वाली सूरज ताल और मंडी में पराशर झील के पास 2,592 मीटर की ऊंचाई पर स्थित एक छोटी झील शामिल रही। सर्वेक्षण के दौरान डीपर प्रो प्लस सोनार को मानव रहित सतही नौका पर लगाया गया। दीपक ताल में 25 हजार से अधिक गहराई के बिंदु जुटाए गए।

यहां अधिकतम गहराई 7.44 मीटर और अनुमानित आयतन 41,929.05 घन मीटर पाया गया। सूरज ताल में पांच हजार से अधिक बिंदु दर्ज किए गए। इसकी अधिकतम गहराई 2.56 मीटर और आयतन 9,400.95 घन मीटर रहा। वहीं पराशर झील के पास अध्ययन की गई झील में करीब एक हजार बिंदु दर्ज हुए। इसकी अधिकतम गहराई करीब 1.3 मीटर और आयतन 2,947.53 घन मीटर आंका गया। शोधकर्ताओं ने झीलों में पानी की वास्तविक मात्रा का पता लगाने के लिए सोनार सर्वेक्षण से मिले आंकड़ों की तुलना पारंपरिक फार्मूलों से की।

अध्ययन में पाया गया कि इन फार्मूलों से निकले अनुमान और वास्तविक सर्वेक्षण के आंकड़ों में भारी अंतर था। इससे संकेत मिलता है कि हिमालय की ऊंचाई वाले क्षेत्रों में स्थित झीलों का आयतन केवल पारंपरिक फार्मूलों के आधार पर सटीक रूप से तय करना कठिन हो सकता है। शोध में आधुनिक सोनार आधारित सर्वेक्षण तकनीक को अधिक प्रभावी पाया गया। शोध कार्य में आईआईटी मंडी के स्कूल ऑफ सिविल एंड एनवायरनमेंटल इंजीनियरिंग की पीएचडी स्कॉलर भावना पाठक शामिल रहीं। 

क्या है सोनार
साउंड नेविगेशन एंड रेंजिंग यानी सोनार एक ऐसा इलेक्ट्रॉनिक उपकरण है, जो ध्वनि तरंगों की सहायता से पानी के अंदर मौजूद वस्तुओं की दूरी, दिशा और स्थिति का पता लगाता है। इसे आमतौर पर जहाजों, पनडुब्बियों और समुद्री अनुसंधान कार्यों में इस्तेमाल किया जाता है।
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सोनार और मानव रहित सतही नौका का संयोजन हिमालयी झीलों की गहराई, जल क्षमता और अन्य भौतिक विशेषताओं का आकलन करने का प्रभावी विकल्प है। इससे दुर्गम और ऊंचाई वाले क्षेत्रों में बिना बड़े और महंगे सर्वेक्षण उपकरणों के झीलों का अध्ययन किया जा सकता है। -प्रो. डेरिक्स प्रेज शुक्ला, प्रोफेसर, आईआईटी मंडी
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