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नालागढ़ में गेहूं का उत्पादन आठ हजार मिट्रिक टन कम

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ओमपाल सिंह
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बद्दी (सोलन)। प्रदेश का सबसे बड़े गेहूं उत्पादक नालागढ़ क्षेत्र में इस साल मार्च में अचानक तापमान बढ़ने से उत्पादन कम रहा। पिछले वर्ष से 20 से 30 फीसदी तक गेहूं का कम उत्पादन हुआ जबकि किसानों ने बीज, खाद और अन्य दवाइयों के दाम पर पिछले वर्ष की तुलना में दो गुणा पैसा खर्च किया।
नालागढ़ में 11 हजार हेक्टेयर भूमि पर गेहूं की फसल उगती है। इस पर करीब 30 हजार मिट्रिक टन उत्पादन होता है। सिंचाई वाले क्षेत्र में 50 क्विंटल प्रति हेक्टेयर उत्पादन होता है जबकि असिंचित क्षेत्र में 15 क्विंटल प्रति हेक्टेयर गेहूं उगती है। इस साल जनवरी-फरवरी में अधिक बारिश रही और मार्च महीना सूखा निकलने से अचानक तापमान बढ़ गया जिससे गेहूं समय से पहले पक गई।
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किसानों को इस वर्ष अच्छी फसल मिलने की उम्मीद थी लेकिन उनकी सारी उम्मीदों पर पानी फिर गया। पिछले वर्ष यहां 30 हजार मिट्रिक टन का उत्पादन हुआ था जबकि इस वर्ष 22 हजार ही रह गया। किसानों ने 32 रुपये प्रति किलो गेहूं का बीज लगाया था। खाद के दाम प्रति बैग डबल हो गया। किसानों को पहले खाद समय पर नहीं मिली, जब मिली तो उसके रेट दोगुना हो गए। दवाइयों के दाम भी दोगुना हो गए।
बद्दी के किसान कृष्ण ने बताया कि जिन खेतों में उन्हें 50 क्विंटल गेहूं मिलती थी, वहां उन्हें 30 क्विंटल ही मिल पाई। गेहूं के दाने का आकार भी काफी छोटा रह गया। किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष सुरमुख सिंह ने बताया कि इस वर्ष गेहूं के दाम में 55 रुपये की बढ़ोतरी की जबकि बीज, खाद, कीटनाशक दवाओं के दाम दोगुना हो गए।
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इस वर्ष गेहूं का उत्पादन 25 से तीस फीसदी कम हुआ है। इस वर्ष गेहूं का फसल किसानों के लिए घाटे का सौदा रहा। किसानों के बीज, खाद व दवाई का पैसा भी वसूल नहीं हुआ है जबकि कटाई, बुआई और सिंचाई पर होने वाले खर्च को किसानों ने अपनी जेब से ही दिया। उन्होंने किसानों को हुए नुकसान का उचित मुआवजा देने की मांग की है।
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