भारतीय मजदूर संघ हिमाचल प्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र ठाकुर। संवाद
अर्की क्षेत्र से सुरेंद्र ठाकुर को भी किया था अभिभावकों ने रवाना
ट्रेन में ही छुपा दिए थे पटके, सादी वर्दी में घूम रहे थे गुप्तचर
योगेश शर्मा
अर्की (सोलन)। क्षेत्र के कार सेवक 27 अक्तूबर 1990 को शिमला से अयोध्या की ओर तिलक और भगवा पटका पहनाकर रवाना किए थे। इसी दौरान भारतीय मजदूर संघ हिमाचल प्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष सुरेंद्र ठाकुर ने बताया कि अधिकतर लोग रो रहे थे। उन्होंने बताया कि मेरे ताया-ताई, दोनों छोड़ने आए थे। दोनों भावुक हो गए, क्योंकि सात माह बाद उनकी शादी थी और बड़ी बहन शिमला के अस्पताल में भर्ती थी।
कालका में भगवा पटका छुपा लिया और ट्रेन में अपनी-अपनी स्लीपर श्रेणी की सीट पर बैठ गए। वहां रेल में चढ़ते ही रास्ते में हर डिब्बे में सादी वर्दी में गुप्तचर थे जो हमारी पूछताछ कर रहे थे। परंतु जब हम दूसरे दिन मुरादाबाद के पास पहुंचने ही वाले थे तब दूसरे गण के एक कार सेवक को गुप्तचरों ने पकड़ लिया एक-एक करके मुरादाबाद स्टेशन पर हमें उतार कर हिरासत में ले लिया।
मुरादाबाद में जैसे ही हमें रेलवे स्टेशन पर उतारा गया हमारी वाहिनी ने जोर-जोर से राम मन्दिर के नारे लगाने शुरू कर दिए वहां पर उपस्थित सैकड़ों वाहनों ने जैसे ही हमारे नारे सुने वैसे ही हम को एक-एक करके तिलक लगा कर स्वागत किया। स्थानीय पुलिस प्रशासन ने हमें एक बस में बिठाकर एक सरकारी स्कूल में अस्थाई जेल में हिरासत में रखा। पुलिस को जानकारी मिली की मुरादाबाद के इस स्कूल पर कुछ उपद्रवी हमला कर सकते हैं तो हमें रातों-रात वहां से बस द्वारा बिजनौर की जेल में स्थानांतरित कर दिया गया। वहां 302 और अन्य धाराओं में सजा काट रहे कैदियों को रखा गया था। इनमें डिस्पेंसरी और अन्य खाली बैरकों में कार सेवकों को रखा गया। बाद में जेल में हमें सूचना मिली की मुरादाबाद के जिस स्थान पर हमें हिरासत में रखा गया था उस स्थान पर उपद्रवियों ने हमला कर दिया है।
3 नवंबर को हमें पता चला कि लाखों कार सेवक पैदल तंग रास्तों से अयोध्या के नगर में प्रवेश कर चुके तथा मुलायम सरकार ने सभी रास्तों की नाकेबंदी कर दी है लेकिन कारसेवक आगे बढ़ने पर अड़े हैं। इस दौरान हम सभी जेल में राम मंदिर के समर्थन में नारे लगाने लगे और दोपहर तक खबर मिली की अयोध्या में राम भक्तों पर गोली चल पड़ी जिसमें कुछ लोगों की मौत हो गई। कुछ राम भक्त बुरी तरह जख्मी हो गए परंतु इसके बावजूद कार सेवक विवादित ढांचे बाबरी मस्जिद के दोनों गुमदों पर मुहूर्त के अनुसार कारसेवा करने में कामयाब हो गए।