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बद्दी नप के अध्यक्ष-उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव

Tue, 14 Feb 2017 11:01 PM IST
ब्यूरो, बद्दी सोलन
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सोलन में डीसी को अ‌‌व‌िश्वास प्रस्ताव सौंपते बद्दी नप के पाषद। - फोटो : amarujala
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कांग्रेस का गढ़ मानी जाने वाली नगर परिषद बद्दी में कांग्रेस पार्षदों ने भाजपा समर्थित पार्षदों से हाथ मिलाते हुए दून के विधायक राम कुमार चौधरी के बड़े भाई नप अध्यक्ष मदन लाल चौधरी के अलावा उपाध्यक्ष मोनिका कौशल के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव पारित कर दिया है। नौ पार्षदों की नगर परिषद में पांच पार्षदों के नो कांफिडेंस मोशन से अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की कुर्सियां खतरे में पड़ गई हैं।
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मंगलवार को उपायुक्त सोलन को सौंपे प्रस्ताव में पांचों पार्षदों ने अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर मनमर्जी से कार्य करने के आरोप लगाए हैं। पार्षदों का कहना है कि दोनों पदाधिकारी पक्षपात और असंतोषजनक कार्य कर रहे हैं। बिना उनकी सहमति के फैसले ले रहे हैं।

अध्यक्ष और उपाध्यक्ष पर विश्वास नहीं रहा है। लिहाजा उन्हें पद से हटाने की मांग की है। पार्षदों के इस कदम ने बद्दी के राजनैतिक गलियारों में हलचल पैदा कर दी है। ऐसे में सत्तासीन कांग्रेस अपना वर्चस्व बचाने की फिराक में है तो कांग्रेस को पट्खनी देने के लिए भाजपा कोई चूक न करने के प्रयास में है। ऐसे में अब यह लड़ाई पार्षदों की नहीं रही, सीधी बीजेपी और कांग्रेस के बीच में हैै। उधर डीसी सोलन डॉ. राकेश कंवर ने अविश्वास प्रस्ताव मिलने की पुष्टि करते हुए कहा कि नियमानुसार आगामी कार्रवाई
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की जाएगी।

यह उतरे बगावत पर
कांग्रेस के मौजूदा पार्षद नरेंद्र कुमार दीपा और भाजपा समर्थित पार्षद निर्मला ठाकुर, संदीप सचदेवा, माया चौधरी तथा सुषमा कुंडलस के साथ मिलकर उपायुक्त सोलन को अध्यक्ष और उपाध्यक्ष के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव सौंपा। दीपा ने कहा कि नप में केवल अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की मनमानी चल रही है। उनके वार्ड की प्राथमिकता वाले कार्यों को नहीं किया जा रहा। हाउस टैक्स को लेकर भी उन्होंने नप को ज्ञापन सौंपा था। उन्होंने कहा कि वह कांग्रेस छोड़ने को लेकर अभी विचार करेंगे।

दून कांग्रेस को लग सकता है झटका
दून के विधायक राम कुमार चौधरी के बड़े भाई मदन चौधरी के खिलाफ अविश्वास प्रस्ताव ने दून कांग्रेस को भी बड़ा झटका दिया है। बताया जा रहा है कि पार्षद नरेंद्र दीपा चौधरी, विधायक के परिवार के करीबी हैं। इसके बावजूद उनका यह कदम कई राजनैतिक कल्पनाओं को हवा दे रहा है। कहा जा रहा है कि पार्षद को भाजपा नप में अध्यक्ष पद दे रही है जबकि कांग्रेस में रहते हुए उन्हें मौजूदा नप के अंतिम दो वर्षों में उपाध्यक्ष का पद दिया जाना तय किया था। हालांकि नप अध्यक्ष इस राजनैतिक हलचल को सामान्य बता रहे हैं।

16 वर्ष तक किया है राज
विधायक रामकुमार चौधरी के परिवार ने नगर परिषद बद्दी में 16 साल तक राज किया। सबसे पहले वर्ष 2000 के नगर परिषद चुनाव में रामकुमार चौधरी के बड़े भाई मदन चौधरी ने बहुमत साबित कर कुर्सी हासिल की। वर्ष 2005 में नप अध्यक्ष की कुर्सी आरक्षित होने के कारण मदन चौधरी की पत्नी भूपेंद्र कौर को अध्यक्ष की गद्दी प्राप्त हुई। वर्ष 2010 में राज्य सरकार द्वारा स्थानीय निकाय चुनाव सीधे तौर पर करवाए गए थे जिसमें अध्यक्ष उपाध्यक्ष को पांच साल तक नहीं हटाया जा सकता था। मदन चौधरी ने सीधे चुनाव में दूसरी बार नगर परिषद अध्यक्ष का ताज पहना था। वर्ष 2016 में वे तीसरी बार अध्यक्ष बन गए।

नप अध्यक्ष ने की आपात बैठक
अविश्वास प्रस्ताव देने के बाद कांग्रेसी खेमे की आपात बैठक बुलाई गई। कांग्रेस समर्थित बद्दी नप के कार्यालय में चेयरमैन मदन चौधरी की अगुवाई में उपाध्यक्ष मोनिका कौशल, पार्षद सतवीर कौर और कुछ अन्य खास लोगों के साथ यह बैठक चली। पांचवें कांग्रेसी पार्षद के भाजपा पार्षदों के साथ होने के चलते करीब 45 मिनट तक कार्यालय में गुफ्तगू का दौर चला। नप अध्यक्ष मदन चौधरी ने कहा कि प्रस्ताव से नप बद्दी पर कोई असर नहीं पड़ेगा। कांग्रेसी खेमा मजबूत है, नाराज पार्षद को भी वह मना लेंगे।

चेयरमैन पद पर आंच
नप बद्दी में कांग्रेस के पांच और भाजपा के चार पार्षद एक साल पहले चुनकर आए थे। अब कांग्रेसी पार्षद के पाला बदलने से भाजपा बहुमत में आती दिख रही है। हालांकि प्रशासन द्वारा बुलाई बैठक में पांचों सदस्यों की हाजिरी होने के बाद ही अविश्वास प्रस्ताव सिरे चढे़गा और अध्यक्ष-उपाध्यक्ष को पद त्यागना होगा। यदि ऐसा हुआ तो दून के विधायक राम कुमार चौधरी के भाई एवं नप अध्यक्ष मदन चौधरी तथा उपाध्यक्ष मोनिका कौशल की कुर्सी जा सकती है।  

पहली बार नो कॉफिडेंस मोशन
नगर परिषद बद्दी के इतिहास में पहली बार नो कॉन्फिडेंस मोशन आने के बाद भाजपा आगे बढ़ती नजर आ रही है। बद्दी नप में साल 2016 के चुनाव में पहली बार भाजपा समर्थित पार्षदों की संख्या चार तक पहुंची है। भाजपा खेमे में एक कांग्रेसी पार्षद के आने से अब नप में पहले बदलाव की तैयारी नजर आ रही है। कांग्रेस सत्ता पर कब्जा बनाए रखने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगा रही है।
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