ठोडा नृत्य सिर्फ एक कला नहीं, बल्कि शौर्य और कौशल का खेल है। इसमें विशेष पारंपरिक लिबास पहने खिलाड़ी मैदान में उतरते हैं। ये खिलाड़ी न केवल विरोधी दल के तीरों के तीखे आक्रमण को झेलते हैं, बल्कि पलक झपकते ही अपने धनुष-बाण से उसका करारा जवाब भी देते हैं। इस खेल के नियम बेहद कड़े हैं, यदि कोई खिलाड़ी थककर मैदान से बाहर हो जाता है, तो उसे पराजित माना जाता है। इसके अलावा, खेल की गरिमा बनाए रखने के लिए पैर पर तीर मारना फाउल माना जाता है।
ठोडो कमेटी के सदस्यों के अनुसार, यह खेल सतयुग के काल से खेला जा रहा है। प्राचीन समय में यह एक वास्तविक युद्ध शैली थी, जिसने समय के साथ अब एक पारंपरिक खेल का रूप ले लिया है। इस खेल की अपनी कुछ खास विशेषताएं हैं। इसमें खेल में इस्तेमाल होने वाले तीर विशेष चांव की लकड़ी से तैयार किए जाते हैं। हिस्सा लेने वाले योद्धा तीर-कमान के साथ-साथ ढांगरू, सिलारा, डागरा और चमड़े के विशेष जूते पहनकर मैदान में उतरते हैं।
इस रोमांचक और ऐतिहासिक खेल को देखने के लिए हर साल ठोडो मैदान में भारी संख्या में खेल प्रेमी और पर्यटक पहुंचे हैं। इस वर्ष इस पारंपरिक उत्सव को और खास बनाने के लिए प्रदेश के स्वास्थ्य मंत्री धनी राम शांडिल बतौर मुख्य अतिथि शिरकत की और खिलाड़ियों का हौसला बढ़ाया।